प्रदेश में 2022 तक बिजली उत्पादन क्षमता 12,734 मेगावाट हो जाएगी। अगले दो साल में तापीय परियोजनाओं से उत्पादन में 7,260 मेगावाट की वृद्धि होने की संभावना है।
मौजूदा समय प्रदेश के बिजलीघरों की कुल उत्पादन क्षमता 5,474 मेगावाट है। भविष्य में बिजली की मांग में इजाफा होने की संभावना से ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने निर्माणाधीन तापीय बिजली इकाइयों का काम तय समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने लेटलतीफ चल रही पुरानी परियोजनाआें को समय पर पूरा करने के भी निर्देश दिए। वेे सोमवार को राज्य विद्युत उत्पादन निगम के कामकाज की समीक्षा कर रहे थे।
समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि 1320 मेगावाट बिजली उत्पादन इसी वर्ष बढ़ जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 2017 में सरकार बनने के बाद से ही बिजली उत्पादन बढ़ाने के प्रयास तेजी से किए जा रहे हैं। पूर्ववर्ती सरकारों में शुरू परियोजनाओं की धीमी रफ्तार को बढ़ाया गया है। मेजा में 12,176 करोड़ की लागत से संयुक्त क्षेत्र में 660-660 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इसकी एक इकाई पिछले साल अप्रैल में चालू हो गई थी जबकि दूसरी इकाई अक्तूबर के पहले सप्ताह में चल जाएगी।
हरदुआगंज तापीय परियोजना से भी 660 मेगावाट बिजली उत्पादन दिसंबर में शुरू हो जाएगा। शर्मा ने बताया कि ओबरा बी परियोजना की 660-660 मेगावाट क्षमता की दोनों इकाइयों से मार्च 2022 तक उत्पादन शुरू होगा। 1320 मेगावाट की जवाहरपुर परियोजना भी 2022 तक चालू हो जाएगी। पनकी में 660 मेगावाट की इकाई के अगले साल दिसंबर तक चलने की संभावना है। 1980 मेगावाट की घाटमपुर परियोजना मई 2022 से शुरू हो जाएगी।