लखनऊ। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान सिद्ध परमात्माओं की आराधना और आत्मा के कल्याण का माध्यम है। इससे आत्मशुद्धि, कर्मों की निर्जरा, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की भावना को दृढ़ करने की प्रेरणा मिलती है। ये बातें आचार्य सुबल सागर जी महाराज ने शुक्रवार को गोमती नगर स्थित जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के शुभारंभ के अवसर पर कहीं। विधान के पहले दिन भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, घटयात्रा तथा सिद्धचक्र पूजन संपन्न हुआ। शाम को सिद्धचक्र विधान की भव्य आरती की गई। विधान में श्रीपाल की भूमिका विनय कपूर, मैनासुंदरी की भूमिका अर्चना जैन ने निभाई। मुख्य कलश की स्थापना अरविंद एवं मनीषा जैन ने की और झंडारोहण अनीता, राजीव एवं संदीप जैन परिवार ने किया।