रिम-धुरा उद्योग के लिए देश-विदेश में पहचाने जाने वाले शामली के चुनावी चौसर में किसान प्रत्याशियों को कई कसौटियों पर कस रहे हैं। भाजपा के लिए इस सीट को बचाए रखना बड़ी चुनौती है। बहुचर्चित कैराना से सटे इस विधानसभा क्षेत्र में भी ध्रुवीकरण की कोशिशें हो रही हैं।
इस बार किसान आंदोलन का असर साफ नजर आ रहा है। किसानों के मुद्दे और उनकी नाराजगी चुनाव में बड़ा असर डालेगी। आंदोलन के दौरान गठवाला खाप के चौधरी राजेंद्र सिंह मलिक सरकार के पक्ष में थे। खाप के थांबेदार श्याम सिंह बहावड़ी अंत तक आंदोलन के साथ बने रहे। यहां से भाजपा समेत चार दलों के प्रत्याशी जाट बिरादरी से हैं। भाजपा से विधायक तेजेंद्र निर्वाल, सपा रालोद गठबंधन से प्रसन्न चौधरी, बसपा से बिजेंद्र मलिक कुड़ाना और आम आदमी पार्टी से बिजेंद्र मलिक कुरमाली।
वहीं, कांग्रेस से अय्यूब मैदान-ए-जंग में हैं। ऐसे में यहां खाप का रुख बहुत कुछ तय करेगा। वर्ष 2012 में बनी इस सीट पर कांग्रेस के पंकज मलिक जीते थे। फिर 2017 में तेजेंद्र निर्वाल विधायक बने। बात मतदाताओं की करें तो सीबी गुप्ता कॉलोनी के अजय शर्मा कहते हैं कि भाजपा सरकार में विकास काफी हुआ है। आपराधिक घटनाओं में कमी आई है। सभी को कसौटी पर कसने के बाद ही वोट करेंगे।
दयानंद नगर के हरपाल मलिक कहते हैं कि किसान आंदोलन का असर इस बार इस सीट पर दिखाई देगा। कोरोना से हुई मौतें भी असर डालेंगी। एमएसके रोड के दुकानदार महेश कहते हैं कि हाईवे का जाल बिछ रहा है। सुरक्षा की भावना बढ़ी है, लेकिन महंगाई व बेरोजगारी से परेशान भी हैं। माजरा रोड निवासी अनिल चौधरी कहते हैं कि गन्ना मूल्य का समय से भुगतान, डीजल के दाम व बिजली की दरों में वृद्धि अहम मुद्दे होंगे। आजाद नगर निवासी जाकिर भी महंगाई व बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार की आलोचना करतेे नजर आए।
ये मुद्दे भी अहम
गन्ना का बकाया भुगतान समय पर न होना, निर्माणाधीन दिल्ली-देहरादून हाईवे, अंबाला-शामली इकनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण से मिलने वाले मुआवजे का मुद्दा भी अहम है।
वर्ष 2017 का हाल
प्रत्याशी दल वोट
तेजेंद्र निर्वाल भाजपा 70,085
पंकज मलिक कांग्रेस 40,365
बिजेंद्र मलिक रालोद 33,551
मनीष कुमार निर्दलीय 31,824
मोहम्मद इस्लाम बसपा 17,114
वोटों का गणित
जाट 68000
मुस्लिम 70000
वैश्य 38000
एससी 35000
कश्यप 23000
ब्राह्मण 22000
गुर्जर 21000
अन्य 28000