लखनऊ। कबीर महोत्सव के दूसरे दिन की आखिरी प्रस्तुति के ताैर पर अभिनेत्री और थिएटर कलाकार ज्योति डोगरा के चर्चित एकल नाटक मांस का मंचन हुआ। फिजिकल थिएटर शैली में पेश किए गए इस नाटक में संवाद कम थे, लेकिन शरीर, सांसों की लय, आवाज और देह-भाषा ही कहानी बन गए। ज्योति ने मांस को एक ऐसे शरीर के रूप में पेश किया, जिसे समाज गढ़ता भी है और नियंत्रित भी करता है। स्त्री शरीर पर बोझ, पहचान की तलाश, भय, हिंसा और उम्मीद जैसे सारे आयाम इस नाटक में नजर आए। नाटक के खत्म होने पर सभागार में सन्नाटा पसर गया।
कबीर महोत्सव।
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