लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत व प्राकृत भाषा विभाग की पोस्ट डॉक्टोरल फेलो डॉ. सीता देवी ने अपना शोध कार्य पूरा किया। उन्होंने विपश्यना का विसुद्धिमग्ग में दार्शनिक अध्ययन विषय पर शोध किया। इस शोध का निर्देशन डॉ. बृजेश कुमार सोनकर ने किया। विभाग में इस ग्रंथ का औपचारिक प्रस्तुतिकरण किया गया। प्रस्तुतिकरण के दौरान डॉ. सीता देवी ने विपश्यना के त्रिरत्न शील, समाधि और प्रज्ञा की उपादेयता बताई। उन्होंने इनकी सामाजिक, नैतिक एवं शैक्षिक महत्ता पर प्रकाश डाला। डॉ. सीता देवी ने बताया कि विपश्यना से चारित्रिक विकास और स्व-अनुशासन जैसी क्षमताएं सुदृढ़ होती हैं। ये आधुनिक समाज की आधारभूत आवश्यकता हैं। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. अभिमन्यु सिंह, विभाग के शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।