लखनऊ। इंस्पेक्टर सतीश की हत्या के बाद आरोपी देवेंद्र ने असलहे, कपड़े व जूते कनौसी नहर में फेंक दिए थे। फिर काली चप्पल पहनकर वह साइकिल से चौक गया। वहां साइकिल छोड़कर वह ई रिक्शा से बालू अड्डा पहुंचा था। लंबी दूरी तक साइकिल चलाने की वजह से देवेंद्र के पैरों की नसों में खिंचाव आ गया और उसे चलने में दिक्कत हो रही थी।
सीसीटीवी फुटेज के जरिए पुलिस ने ई रिक्शा चालक को तलाशकर पूछताछ की तो उसने बताया कि देर रात बालू अड्डा तक जिस युवक को छोड़ा था वह धपककर चल रहा था। फुटेज में संदिग्ध के पैर में काली चप्पल दिखी, जिस पर सफेद दाग लगा था। घटना के अगले दिन 13 नवंबर को देवेंद्र अपने पिता ताराचंद्र वर्मा के साथ कृष्णानगर कोतवाली वही काली चप्पल पहनकर पहुंच गया और उसे चलने में दिक्कत हो रही थी।
पुलिस ने जब कोतवाली के सीसीटीवी कैमरे को चेक किया तो देवेंद्र की चप्पल और फुटेज में दिखे संदिग्ध की चप्पल मेल खा गई। दोनों पर सफेद दाग भी था। यहीं से पुलिस को देवेंद्र पर शक हो गया। पुलिस जब देवेंद्र की फोटो ई रिक्शा चालक को दिखाई तो उसने तुरंत पहचान लिया।
लखनऊ। वारदात के समय भावना कार में बैठी पति सतीश पर गोलियां चलते देख रही थी। घटना के बाद जब पुलिस मौके पर पहुंची तो भावना ने बयान दिया कि सिरदर्द के चलते वह और बेटी कार में सो गई थीं। गोली चलने की आवाज पर समझा कि पटाखा दगा है। बाद में जब पति चीखे तो वह कार से उतरी और उन्हें खून से लथपथ देखा। पुलिस को भावना के बयान शुरु से ही विरोधाभासी लग रहे थे।
एडीसीपी साउथ शशांक सिंह ने बताया कि देवेंद्र पहले बैंक में पीओ की नौकरी करता था। यूपीएससी की तैयारी के लिए उसने वर्ष 2018 में नौकरी छोड़ दी थी। उसने एक बार यूपीएससी की परीक्षा दी थी। देवेंद्र अंग्रेजी वेब सीरिज और फिल्में देखने का शौकीन है। वेब सीरिज देखकर ही उसने वारदात का तरीका चुना। असलहों की व्यवस्था के लिए उसने यू ट्यूब पर सर्च कर कुछ मोबाइल नंबर हासिल किए। उन्हीं नंबरों की मदद से उसे कानपुर के एक व्यक्ति का नंबर मिला था। इसके बाद देवेंद्र कानपुर गया और वहां से 70 हजार रुपये में पिस्टल और 15 हजार रुपये में तमंचा खरीद लाया। वारदात के समय पहने कपड़े और जूते भी उसने ऑनलाइन खरीदे थे।
हत्यारोपी देवेंद्र ने पुलिस से बचने के लिए पूरी प्लानिंग की थी। बहनोई की कार में जीपीएस ट्रैकर लगाकर सेकंड हैंड खरीदे गए मोबाइल से कनेक्ट किया था। इस मोबाइल के बारे कोई नहीं जानता था। वारदात की रात आरोपी ने अपना मोबाइल फोन भांजे को दे दिया था और उससे ऑनलाइन खाना बुक करने की बात कही थी। ताकि उसके मोबाइल फोन की लोकेशन चेक करने पर घर में ही मिले और पुलिस उस पर शक न कर सके। हत्या के बाद देवेंद्र ने सतीश की कार में लगे जीपीएस ट्रैकर को तोड़ दिया था। पुलिस ने देवेंद्र के पास से बरामद मोबाइल को जब खंगाला तो उसमें ट्रैकिंग एप मिला। इस एप को चेक करने पर पता चला कि इससे सतीश की कार की लोकेशन ट्रैक की गई थी।