इदारा-ए-तहफ्फुज-ए-मर्सियाख्वानी की जानिब से इमामबाड़ा नाजिम साहब में मजलिस को खिताब करते काजि़
लखनऊ। नीयत फत्ह से शमशीर-ओ-सिर पर बांधी है, किस के सरवर की हिमायत में कमर बांधी है। जैसे असरदार अशआर के साथ हजरत अब्बास (अ.स.) की शुजाअत और वफादारी पर मर्सिया पढ़ा गया। अवसर था इदारा-ए-तहफ्फुज-ए-मर्सियाख्वानी की ओर से इमामबाड़ा नाजिम साहब, विक्टोरिया स्ट्रीट में आयोजित अशरे की तीसरी मजलिस का। आले मोहम्मद की पसंदीदा जाकिरी विषय पर आयोजित मजलिस को काजिम अबरार रिजवी ने खिताब किया। उन्होंने हजरत अब्बास (अ.स.) के हालात पर मर्सिया पेश करते हुए कर्बला के पैगाम, वफादारी और कुर्बानी को प्रभावी अंदाज में बयान किया। मजलिस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
इदारा-ए-तहफ्फुज-ए-मर्सियाख्वानी की जानिब से इमामबाड़ा नाजिम साहब में मजलिस को खिताब करते काजि़
इदारा-ए-तहफ्फुज-ए-मर्सियाख्वानी की जानिब से इमामबाड़ा नाजिम साहब में मजलिस को खिताब करते काजि़