लखनऊ। छोटी-छोटी समस्याओं पर निराश होने से बेहतर है जीवन की कठिनाइयों का सामना सकारात्मक सोच और साहस के साथ किया जाए। यही संदेश दिया नाटक अदृश्य ने, जिसका मंचन बुधवार शाम अंतराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान में संस्था विजय बेला की ओर से किया गया। नाटक की कहानी दृष्टिहीनों के जीवन पर आधारित थी। इसके लेखक चंद्रशेखर फनसालकर थे। परिकल्पना व निर्देशन चंद्रभाष सिंह का रहा। नाटक में कांताबाई की ओर से संचालित ब्लाइंड्स क्लब के माध्यम से हास्य और रोमांच का रोचक ताना-बाना बुना गया। अंधत्व के दर्द, संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराते हुए जीवन जीने की प्रेरणा को बेहद मार्मिक तरीके से प्रस्तुत किया गया। दर्शक कई बार भावुक हुए और अंत में संदेश दिया गया कि जीवन हर परिस्थिति में मूल्यवान है और इसे साहस व आशा के साथ जीना चाहिए। मंच पर जूही कुमारी, रोहित चौहान, प्रिया बाजपेई, लावण्या बाजपेई, गिरिराज किशोर शर्मा, मुकुल कुमार, उज्ज्वल सिंह और चंद्रभाष सिंह ने अभिनय किया।
नाटक का मंचन करते कलाकार।
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