लखनऊ। आर्थिक रूप से संपन्न शीला ने परिवार की मर्जी के खिलाफ अपने साथी शिक्षक अशोक से शादी रचा ली। मगर इससे उसके दादा जी नाराज हो गए और संबंध तोड़ लिए। मगर जब शीला को बेटा हुआ तो वह उससे मिलने पहुंच गए।
शीला ने उन्हें भरमाने के लिए पति अशोक को नौकर बनाया और एक अन्य व्यक्ति को उधार का पति। घर की संपन्नता दिखाने के लिए पड़ोसियों से सामान भी लिया। मगर, अनुभवी दादाजी के सामने पोती की पोल खुल गई। इस दौरान दर्शकों का खूब मनोरंजन हुआ।
नाटक में पोषिता राज, अक्षत ऋषि, शीलू मलिक, सुमित श्रीवास्तव, सुअंश सक्सेना, पीहू गुप्ता, अभिषेक राजपूत, दिनेश कुमार और रोहित शुक्ला ने अहम निभाई। लेखन वनमाला भवालकर, परिकल्पना व निर्देशन विपिन कुमार का रही। संवाद