लखनऊ। अवध की संस्कृति को समझना है तो सिर्फ लखनऊ तक सीमित रहना काफी नहीं। यहां के छोटे कस्बों ने भी इसकी तहजीब, परंपराओं और जीवनशैली को आकार दिया है। इसी विरासत को सामने लाती लखनऊ बायोस्कोप की सातवीं प्रदर्शनी ''अवध के कस्बाती रंग'' शनिवार को कैसरबाग स्थित केंद्र में शुरू हुई। प्रदर्शनी में खैराबाद, रुदौली, संडीला, महमूदाबाद और महाराजगंज समेत करीब 21 कस्बों की वास्तुकला, कारीगरी, साहित्य और रोजमर्रा की जिंदगी को तस्वीरों व अन्य सामग्रियों के जरिये दिखाया गया है। उद्घाटन के बाद समन हबीब ने उर्दू लेखिका हमीदा सलीम की किताब शोरिश-ए-दौरान का पाठ किया। इसके बाद किस्से कस्बों से में सबीहा अनवर और सआद फारूकी ने कस्बों की जिंदगी और पुरानी परंपराओं से जुड़े अनुभव साझा किए।