अलकायदा के आतंकी की सूचना के बाद एटीएस
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बेगरिया निवासी मिनहाज ने 2016 में इंट्रीगल यूनिवर्सिटी में लैब असिस्टेंट का काम छोड़ने के बाद बैटरी की एजेंसी ले ली। उसने अपना दुकान खदरा इलाके में खोल रखा था। वहीं पर करीब तीन साल पहले खदरा में रहने वाले मशीरूद्दीन से हुई थी। उस वक्त मशीरूद्दीन ई-रिक्शा चलाता था। बैटरी के लेनदेन के दौरान दोनों में संबंध हुए। इसके बाद मिनहाज की बातों में आकर उसने अपना ई-रिक्शा पिछले साल बेच दिया। इसके बाद उसकी दुकान पर रोज आकर बैठने लगा। जहां से दोनों ने मिलकर आतंकी कारोबार शुरू किया।
एटीएस की पड़ताल में सामने आया कि मिनहाज ने 2016 में इंट्रीगल यूनिवर्सिटी में लैब असिस्टेंट था। वहां की नौकरी उसने छोड़ दी। इसके बाद एक बैटरी की एजेंसी ले ली। जिसका शोरूम और दुकान खदरा इलाके में शिया कालेज के पास खोला। वहीं खदरा का रहने वाला मशीरूद्दीन ई-रिक्शा चलाता था। वह कई बार अपने ई-रिक्शा के बैटरी के चक्कर में मिनहाज की दुकान पर गया। बैटरी खरीदने के दौरान उसकी अक्सर मिनहाज से बातचीत होती थी। ई-रिक्शा से ज्यादा कमाई न होने व परिवार का खर्च न चल पाने की बात भी मशीरूद्दीन मिनहाज से करता था। मिनहाज ने उसे ई-रिक्शा बेचने की सलाह दी। वहीं उससे कहा कि वह उसकी दुकान पर काम करें तो उसका सहयोग हो जाएगा। साथ ही वह उसके परिवार की जरूरतों को पूरा कर देगा। उसके प्रस्ताव को मशीरूद्दीन ने मान लिया। मशीरूद्दीने पिछले लॉक डाउन में जब एकदम आमदनी बंद हो गई तो ई-रिक्शा बेचकर मिनहाज के पास चला गया।
बीमार बेटी का इलाज भी नहीं करा पा रहा था
एटीएस के सूत्रों के मुताबिक मशीरूद्दीन ने अपना खदरा वाला घर भी बेच दिया। उससे मिली रकम को उसने मिनहाज केकहने पर कारोबार में लगाने को तैयार हो गया। इसी बीच उसने रहने केलिए मोहिबुल्लापुर के नौबस्ता में एक टूटा हुआ मकान खरीद लिया। जिसकी आज तक मरम्मत तक नहीं करा सका। घर की दीवारों पर परदे लगाकर आड़ कर दिया। परिवार में उसकी मां शाहजहां बानो, पत्नी सईदा, बेटी जैना, जोया, जेबा और चार साल का बेटा मुस्तकीम है। मशीरूद्दीन की छोटी बेटी काफी बीमार है। उसे सुगर हो गया है। वह इन्सुलिन पर चलती है। उसे दिन में तीन बार इन्सुलिन लगती है। ई-रिक्शा चलाकर उसका इलाज कराने में असमर्थ था। मिनहाज के साथ आने पर उसकी मदद होती रही। जिसके कारण मिनहाज के कहे अनुसार उसने काम शुरू कर दिया।
काम के बहाने जाते थे अन्य प्रदेश
पड़ताल में यह बात सामने आई की बैटरी के नाम पर दोनों मिलकर आतंकी कारोबार को बढ़ाने में जुट गये। दोनों इसके नाम पर कई प्रदेशों में जाने लगे। दोनों एक साथ कई बार जम्मू-कश्मीर भी गये थे। जहां से आतंकी संगठनों के लोगों से मुलाकात करते। कुछ दिनों तक वहां ठहरने के बाद वापस लखनऊ आ जाते। इस दौरान कई बार एजेंसी व मिनहाज के निजी बैंक खातों से जम्मू-कश्मीर में कई संदिग्ध खातों में रुपये भी ट्रांसफर किये गये थे। कई बार संदिग्ध खातों में रकम जमा करने का काम मशीरूद्दीन करता था। हर बार रकम जमा करने के लिए उसे कई बार अलग से धन भी मुहैया कराया जाता था।