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बच्चों की पार्टी अब नहीं रही ‘बच्चा पार्टी’, कैफीन युक्त ड्रिंक और गांजे का चख रहे स्वाद, बन रहे नशेबाज

Mon, 05 Dec 2022 03:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ

सार

सुपरवाइज्ड पार्टियों में मोजितो, कैफीन युक्त ड्रिंक और गांजे का पहली बार किया टेस्ट किशोरों को नशे का आदी बना रहा है। मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों के पास नशा मुक्ति के लिए आने वालों में 50 प्रतिशत किशोर हैं।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
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दोस्तों के संग किशोरों की होने वाली पार्टी अब ‘बच्चा पार्टी’ नहीं रही। इनमें ही मोजितो, कैफीन युक्त ड्रिंक और गांजे का पहली बार किया जा रहा टेस्ट इन्हें धीरे-धीरे नशे का आदी बना रहा है। कैफीन युक्त प्रोडक्ट की आदत बच्चों को समय से पहले बड़ा कर रही है। मनोवैज्ञानिकों व मनोचिकित्सकों ने इस पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में ऐसी पार्टियों से किनारा कर लेना तो संभव नहीं है, लेकिन सुपरवाइज्ड पार्टियों को लेकर अभिभावकों को जागरूक करने की जरूरत है।

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इंदिरानगर स्थित नशा उन्मूलन केंद्र की निदेशक डॉ. शशि राय ने बताया कि मनोवैज्ञानिकों, मनोचिकित्सकों के पास जो मामले आ रहे हैं, उनकी पड़ताल में ऐेसी पार्टियों में ही किया नशे का टेस्ट इसका आदी बनाता है। नशा मुक्ति के लिए आने वालों में 50 प्रतिशत किशोर हैं। हाल के दिनों में शहर के कई प्रतिष्ठित स्कूलों के विद्यार्थियों के चौंकाने वाले मामले मनोचिकित्सकों तक पहुंचे हैं, जिन्हें खतरे की घंटी समझा जाना चाहिए।

ये मामले बयां कर रहे हालात
केस-1: केजीएमयू की एडिक्शन क्लीनिक में आने वाले 16 वर्षीय किशोर ने कक्षा आठ में दोस्त की पार्टी में ही पहली बार गांजे का स्वाद चखा था। बीयर पीना अब उसके लिए आम है। बीते दिन हार्ड नशा करके जब वह आपे से बाहर हुआ तो माता-पिता उसे एडिक्शन क्लीनिक लेकर पहुंचे। केस स्टडी में पता किया गया कि उसे नशे की आदत कैसे पड़ी।
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केस-2: निजी डॉक्टर के पास तीन दिन पहले मामला आया कि एक प्रतिष्ठित स्कूल का बच्चा पानी की बोतल में ब्रीजर भरकर ले आया। खुद तो पिया ही, सहपाठी को भी पिला दिया, जिसे उसका शरीर बर्दाश्त नहीं कर पाया। इससे मामला सामने आया।

मनोचिकित्सक की बात: एडिक्शन क्लीनिक में मनोचिकित्सक डॉ. अमित सिंह का कहना है कि पार्टी करना गलत नहीं है, पर ज्यादातर मामलों में बच्चों का नशे से पहला परिचय यहीं होता है। जरूरी नहीं कि उनका हम उम्र इसके लिए जिम्मेदार हो। कुछ बड़े बच्चे भी ऐसा करने पर मजबूर कर देते हैं। सीधे तौर पर आकर कोई नहीं कहता कि पार्टी में नशा किया। जब हम पड़ताल शुरू करते हैं, तब यह हकीकत सामने आती है।

मनोवैज्ञानिक की बात: काउंसलर व मेंटल हेल्थ वॉरियर मनोवैज्ञानिक नेहा आनंद कहती हैं कि आठ सेशन में से 40 फीसदी ऐसे ही मामले होते हैं, जिसमें बच्चे को कोई न कोई नशे की लत जरूर होती है। शहर में जिस तरह से कैफे, बार व लाउंज की संख्या बढ़ी है और इनमें बिना रोक-टोक बच्चों का प्रवेश इस लत को बढ़ा रहा है।

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समाधान सिर्फ यही, अभिभावक-टीचर रखें ध्यान

डॉ. अमित सिंह, नेहा आनंद व डॉ. शशि राय कहती हैं कि तीन बातों का मुख्य रूप से ध्यान रखना होगा। पहला यह कि सुपरवाइज्ड पार्टियों पर नजर रखी जाए। दूसरा यह कि पार्टी से लौटे बच्चे के व्यवहार पर जरूर गौर करें। शुरुआती लक्षण पता चल जाए तो निदान संभव है। तीसरी यह कि टीनएज को कैफे आदि में बिना अभिभावकों की अनुमति के प्रवेश न दिया जाए।

लिकर इंडस्ट्री को टक्कर दे रहे मोजितो, कैफीनयुक्त ड्रिंक
ब्रिवेरेज इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि मोजितो की कीमत 70 से 100 रुपये है। कैफीनयुक्त ड्रिंक 30 से 120 रुपये में मिल जाती है। इनके नॉनब्रांडेड और ब्रांडेड में 100 से अधिक विकल्प बाजार में हैं। शराब विक्रेता वेलफेयर एसोसिएशन के प्रवक्ता देवेश जायसवाल कहते हैं कि ये ड्रिंक लिकर इंडस्ट्री के कारोबार को टक्कर दे रहे हैं। कैफीनयुक्त ड्रिंक तो किराना जनरल मर्चेंट, रिटेल स्टोर पर उपलब्ध हैं। वहीं, मोजितो इसके अलावा बार में भी मिलता है। टीनएजर्स में ब्रीजर का भी चलन बढ़ा है, जो वाइन शॉप, बीयर शॉप, मॉडल शॉप और बार में मिलती है। 
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