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सुना है क्या: जोरों पर है खींचतान की कहानी, साथ ही 'काम नहीं आया दांव और चेहरा दिखाने की जल्दबाजी' के किस्से

Fri, 03 Jul 2026 12:20 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'जोरों पर है खींचतान' की कहानी। इसके अलावा 'काम नहीं आया दांव' और 'चेहरा दिखाने की जल्दबाजी' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

जोरों पर है खींचतान

कल कारखाने वाले विभाग में इन दिनों अंदरखाने जमकर खींचतान चल रही है। माननीय के विभागों की फेहरिस्त से एक विभाग की कैंची चलने के बाद एक और पर जोर आजमाइश चल रही है। उस विभाग में माननीय के फरमान लागू न होने की एंटी डोज दी गई है लेकिन दिलचस्प है कि उस विभाग के अहम पदों पर पहले से ही माननीय के साहब काबिज हैं। ऐसे में रस्साकशी प्रतियोगिता बराबर से चल रही है। आखिर में जीत किसकी होती है, इसका रिजल्ट आने में तीन महीने लगेंगे।

काम नहीं आया दांव

प्रदेश में तकनीकी पढ़ाई वाले एक विभाग में हाल ही में खाली हुई एक प्रमुख कुर्सी को लेकर खासी जोर आजमाइश हुई। इसके लिए शासन के एक ही बराबर के दो अधिकारियों ने माननीय से लेकर विभिन्न स्तर पर काफी प्रयास किया। हालत यह थी कि एक ने तो बधाइयां भी लेनी शुरू कर दी थीं लेकिन जब उच्च स्तर पर इसकी जानकारी हुई तो ऐन समय पर बाजी पलटते हुए माननीय ने दूसरे को कुर्सी पर बैठा दिया। बैठाया ही नहीं उन्हें तत्काल प्रभार भी ग्रहण करा दिया। अब विभाग में चर्चा है, ऐसा क्या हो गया कि दूसरे का दांव खाली चला गया।

चेहरा दिखाने की जल्दबाजी

फल-फूल वाले मंत्री के सामने उनके अफसरों में चेहरा दिखाने की होड़ रहती है। आला अफसर पीछे रह जाते हैं लेकिन उनके जूनियरों की चाल तेज है। वे मंत्री के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ तो विभाग की गोपनीय रिपोर्ट देने के नाम पर भी नौकरी चला रहे हैं। विभाग का काम उन्हें नहीं पता है लेकिन विभाग से कौन सी सूचना कहां पहुंचानी है, यह बखूबी जानते हैं। यही वजह है कि विभाग में धड़ेबंदी तेज हो गई है।

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