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सुपरटेक एमरॉल्ड प्रकरण : 15 अभियंताओं-वास्तुविदों पर गाज गिरना तय, मित्तल कमेटी इसी सप्ताह सौंपेगी रिपोर्ट

Tue, 14 Sep 2021 09:30 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

नोएडा के सुपरटेक एमरॉल्ड मामले में उच्चस्तरीय मित्तल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट करीब-करीब तैयार कर ली है। इस बारे में छनकर आ रहीं सूचनाओं के अनुसार, इस गड़बड़झाले में 15 अभियंताओं और वास्तुविदों पर गाज गिरना तय है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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नोएडा के सुपरटेक एमरॉल्ड मामले में उच्चस्तरीय मित्तल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट करीब-करीब तैयार कर ली है। इस बारे में छनकर आ रहीं सूचनाओं के अनुसार, इस गड़बड़झाले में 15 अभियंताओं और वास्तुविदों पर गाज गिरना तय है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की रोशनी में सीईओ के पद पर रहे पांच आईएएस अधिकारी भी दायित्व निर्धारण के घेरे में आ रहे हैं। इसी सप्ताह यह रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाएगी।

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सूत्रों के मुताबिक, कमेटी अपनी फाइनल रिपोर्ट में अधिकारियों के नामों का जिक्र करने के बजाय उस अवधि का जिक्र करेगी, जिसमें ये गड़बड़ियां हुईं। उस अवधि में तैनात रहे वास्तुविद, अभियंता और पर्यवेक्षणीय अधिकारी ही अथॉरिटी की छवि धूमिल करने और घपले के लिए दोषी माने जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सुपरटेक लिमिटेड को आवंटित ग्रुप हाउसिंग भूखंड पर बने दो टावरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है।

इस आदेश में कहा गया है कि टावर संख्या टी-16 तथा टी-17 को तीन माह के अंदर सुपरटैक के व्यय पर सीबीआरआई की देखरेख में ध्वस्त किया जाए। इस मामले में प्रदेश सरकार ने बिल्डर और अथॉरिटी के दोषी अधिकारियों के दायित्व निर्धारण के लिए अवस्थापना एवं औद्यौगिक विकास आयुक्त संजीव मित्तल की अध्यक्षता में चार सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है।
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कमेटी नोएडा में मौका मुआयना करके वस्तुस्थिति जान चुकी है। जरूरी रिकॉर्ड भी उसने ले लिया है। उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना के मानचित्र और संशोधित मानचित्र वर्ष 2005, 2006, 2009 और 2012 में स्वीकृत किए गए। 

बताते हैं कि कमेटी ने इन वर्षों की उन तारीखों को चिह्नित किया है, जिनमें में यह मानचित्र जारी हुए। इसके आधार पर करीब 15 अभियंताओं और वास्तुविदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। ये अभियंता प्रबंधक से लेकर मुख्य महाप्रबंधक स्तर तक केहैं। तीन आईएएस अधिकारियों का भी दायित्व निर्धारण के इस फार्मूले में फंसना तय माना जा रहा है। इनमें से दो आईएएस अधिकारी रिटायर हो चुके हैं। नोएडा के सीईओ ही रहे दो प्रमोटी आईएएस की भूमिका भी बेहद संदिग्ध निकलकर आई है।

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