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सुना है क्या: सलाहकारों में खलबली की कहानी, साथ ही चंदे के खेल में फंसा युवा व साहब ने खूब काटी मलाई के किस्से

Mon, 02 Mar 2026 10:17 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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suna hai kya - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'सलाहकारों में मची खलबली' की कहानी। इसके अलावा 'चंदे के खेल में फंसा युवाओं का भविष्य' और 'साहब ने खूब काटी मलाई...अब दहशत में' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी... 

सलाहकारों में मची खलबली

सेहत सुधार से जुड़े संस्थान में एक के बाद एक घटनाएं हो रही हैं। संस्थान प्रमुख पर जिनका हाथ बताया जा रहा था। अब वो भी हाथ उठा दिए हैं। पिछले दिनों सुर्खियों में रहने वाले संस्थान के समान ही दूसरे संस्थान के कार्यक्रम में उन्होंने अपने चहेते मुखिया वाले संस्थान पर अघोषित हमला बोल दिया। यहां तक कह दिया कि तुम लोग उसके जैसा न बन जाना। इस बयान के बाद संस्थान मुखिया के सलाहकारों में खलबली मची है। दरअसल, संस्थान मुखिया के जाने का वक्त आ गया है लेकिन सलाहकारों का वक्त अभी बचा हुआ है।

चंदे के खेल में फंसा युवाओं का भविष्य

प्रदेश में भावी गुरुजी लोगों से जुड़ा एक आंदोलन लगभग पांच साल से चल रहा है। इसको लेकर राजनीति भी चरम पर है। जैसे-जैसे यह मामला निस्तारण की ओर बढ़ रहा है, इसे लेकर नेतागिरी करने वाले खुश नहीं बल्कि परेशान हैं। अभ्यर्थियों में चर्चा है कि इनमें से कुछ ने इसके चंदे से अपना भविष्य तो बना लिया लेकिन उनके भविष्य का ध्यान नहीं रखा। धीरे-धीरे उनकी पोल खुलती जा रही है। यही वजह है कि वह अब ज्यादा परेशान हैं।

साहब ने खूब काटी मलाई...अब दहशत में

60 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का सरगना दुबई में पकड़ा गया है। वह भारत भी लाया जाएगा। एक एजेंसी के साहब को जब से इसकी जानकारी हुई तब से तनाव बढ़ गया है। हो भी क्यों न? सरगना के रहते खूब मौज काटी। शहर के सबसे पॉश इलाके में कोठी भी बनाई जिसमें सरगना ने खूब आर्थिक सहयोग किया था। उसको बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। अब जब उसे भारत लाने का रास्ता साफ हुआ तो साहब भी चिंता में हैं, क्योंकि पता है कि भूल से भी उनके मुंह से साहब का नाम निकल गया तो बड़ी दिक्कत हो जाएगी।

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