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सुना है क्या: आज 'लंदन में महल' की कहानी, साथ ही नौकरशाहों ने बनाई दूरी व बेलगाम पुलिस कमिश्नरेट के किस्से

Tue, 13 Jan 2026 01:25 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में आज 'यहां किराये पर घर, लंदन में महल' हैं। इसके अलावा 'समानांतर व्यवस्था से नौकरशाहों ने बनाई दूरी' और 'बेलगाम पुलिस कमिश्नरेट... लग रहे दाग' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

यहां किराये पर घर, लंदन में महल

आईएएस अफसरों के खेल भी निराले होते हैं। अब एक पूर्व आईएएस अधिकारी को ही लीजिए। नोएडा में कथित रूप से किराये के घर में रहते हैं और लंदन में महलनुमा बेशकीमती संपत्ति के मालिक हैं। यह बात दीगर है कि दोनों ही उनकी बेनामी संपत्ति बताई जाती हैं। इसकी जांच भी एक एजेंसी कर रही है और लंदन वाली संपत्ति के बारे में सुराग जुटाए जा रहे हैं। कभी नोएडा में सर्वशक्तिमान रहे पूर्व आईएएस बिल्डरों के सरपरस्त बने तो अरबों रुपये की कमाई विदेश में खपाते गए। अब इंतजार एजेंसी के अगले कदम का है जो उन पर भारी पड़ सकता है।

समानांतर व्यवस्था से नौकरशाहों ने बनाई दूरी

समीक्षा की समानांतर व्यवस्था से ज्यादातर नौकरशाहों ने दूरी बना ली है। कुछ तो इतना सहमे हैं कि वे समानांतर व्यवस्था वाली बिल्डिंग की तरफ झांकने से भी परहेज कर रहे हैं। कहीं ऐसा न हो कि इधर झांकने के चक्कर में कइयों की आंख की किरकिरी बन जाएं। हालांकि, समानांतर व्यवस्था का रिजल्ट आना अभी बाकी है। कुछ एक मैडमों ने तो ऐन मौके पर बीमार हो जाने का जुगाड़ भी लगाया है।

बेलगाम पुलिस कमिश्नरेट... लग रहे दाग

प्रदेश का पुलिस कमिश्नरेट वाला एक जिला चर्चा में है। चर्चा किसी अच्छे काम के लिए नहीं बल्कि खाकीधारियों की गिरी हुई हरकतों की वजह से हो रही है। जिले में एक खाकीधारी ने दुष्कर्म की वारदात अंजाम देकर महकमे को शर्मसार किया तो दूसरे ने दर्जनभर बेगुनाहों को इसलिए फर्जी केस में फंसा दिया क्योंकि उसको रिश्वत नहीं दी। ये हाल वहां का है जहां अफसरों की भरमार है। शायद वहां के मुखिया का खाकीधारियों पर काबू नहीं रहा। इसलिए वह निरंकुश हैं और कमिश्नरेट पर गहरे दाग लग रहे हैं।

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