लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय और अनुदानित कॉलेजों में स्ववित्तपोषित कोर्स के छात्र पीएचडी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में वह योग्य होते हुए भी शोध की पढ़ाई करने से वंचित हैं। इसका कारण है कि लविवि के अध्यादेश में केवल नियमित शिक्षकों को ही शोध निर्देशक बनाए जाने का प्रावधान है।
लविवि से संबद्ध अनुदानित कॉलेजों में स्ववित्तपोषित कोर्स के शिक्षकों ने भी उन्हें शोध निर्देशक बनाए जाने की मांग तेज कर दी है। शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल जल्द इस संबंध में कुलपति प्रो. आलोक राय से मुलाकात कर अपनी मांग रखेगा। स्ववित्तपोषित कोर्स के शिक्षकों का कहना है कि उनकी और नियमित शिक्षकों की योग्यता में जब कोई अंतर नहीं है, तो वह पीएचडी गाइड क्यों नहीं बन सकते हैं।
लविवि में भूगोल, इंजीनियरिंग और फार्मेसी सरीखे कोर्स स्ववित्तपोषित शिक्षकों के मार्गदर्शन में ही चल रहे हैं। इसमें पढ़ाई के लिए छात्रों का रुझान भी अच्छा है, इसके बावजूद उन्हें स्ववित्तपोषित कोर्स होने के चलते इसमें प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। जबकि कॉलेजों में कॉमर्स, पत्रकारिता, राजनीति विज्ञान, भूगोल, अंग्रेजी, बीसीए, बीबीए आदि कोर्स स्ववित्तपोषित मोड में चल रहे हैं।
इसलिए नहीं बनाया जा रहा शोध पर्यवेक्षक
जानकारों की माने तो स्ववित्तपोषित कोर्स में शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाने का अधिकार इसलिए नहीं दिया जाता है, क्योंकि उनके नौकरी छोड़ने अथवा सरकारी सेवा में चयन होने की दशा में शोध छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही फर्जीवाड़े की आशंका भी अधिक होती है।
गोरखपुर और कानपुर विवि ने शुरू की पहल
सीएसजेएम कानपुर विश्वविद्यालय और डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय ने इसी सत्र से स्ववित्तपोषित कोर्स के शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाने का फैसला लिया है। ऐसे में इन कोर्स में भी छात्रों के पीएचडी करने की राहें खुल गई हैं। साथ ही शिक्षकों के भी शोध पर्यवेक्षक बनने की लंबी प्रतीक्षा समाप्त हो गई है। इसी का हवाला देते हुए लखनऊ विवि से संबद्ध कॉलेजों में स्ववित्तपोषित कोर्स के शिक्षकों ने भी पीएचडी के लिए निर्देशक बनाए जाने का अधिकार मांगा है।
कुलपति से मिलकर देंगे प्रस्ताव
गोरखपुर और कानपुर विश्वविद्यालय की तर्ज पर लखनऊ विवि भी स्ववित्तपोषित कोर्सों के शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाने का काम करे। हम इस संबंध में जल्द ही कुलपति कर मुलाकात चर्चा करेंगे और प्रस्ताव रखेंगे।
डॉ. शिवकुमार, सह संयोजक- अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ