लखनऊ। सुशांत गोल्फ सिटी के सेरथुआ गांव में मोबाइल पर गेम खेलने को लेकर मां ने जब बेटे को डांटा तो वह फंदे पर लटक गया। पड़ोसियों की मदद से परिजनों ने उसे फंदे से उतारकर अस्पताल में भर्ती कराया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम कराया गया।
मूल रूप से सुल्तानपुर के चांदा निवासी दुर्गेश पांडेय सेना में हवलदार हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती दिल्ली में है। उनका परिवार सेरथुआ गांव में रहता है। मंगलवार रात दुर्गेश का 14 वर्षीय बेटा शिवम पांडेय मोबाइल पर गेम खेल रहा था। ये देख उसकी मां मनोरमा ने डांटा और गेम खेलने से मना किया। इस पर शिवम गुस्सा होकर अपने कमरे में चला गया और दरवाजा बंद कर लिया।
कुछ देर बाद मनोरमा व उनकी सास ने शिवम को आवाज दी मगर कोई जवाब नहीं आया। खिड़की से झांकने पर शिवम फंदे पर लटका दिखा तो आनन-फानन आसपास के लोगों को बुलाकर कमरे का दरवाजा तोड़ा गया। शिवम को फंदे से उतारकर पहले एक निजी अस्पताल ले जाया गया। फिर कमांड अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान बुधवार शाम करीब चार बजे शिवम की मौत हो गई।
कमरे का दरवाजा भीतर से बंद था। बाहर मां और दादी खिड़की से शिवम को फंदे पर लटका देख बिलख रही थीं। जब तक पड़ोसियों को बुलाकर दरवाजा तोड़ा गया तब तक कई मिनट बीत चुके थे। इतनी देर तक कलेजे का टुकड़ा फंदे पर लटका तड़पता रहा और मनोरमा बेबस देखती रहीं। अगर तुरंत कमरे का दरवाजा तोड़कर थोड़ा पहले उसे फंदे से उतार लिया जाता तो शायद जान बच जाती। मगर ऐसा नहीं हो सका। कुछ ही घंटे बाद शिवम की सांसें थम गईं।
परिजनों ने बताया कि शिवम कक्षा नौ का छात्र था। वह आर्मी पब्लिक स्कूल में पढ़ता था। इकलौते बेटे की मौत से माता-पिता सदमे में हैं। यकीन नहीं हो रहा कि उनका चहेता शिवम अब इस दुनिया में नहीं रहा। अन्य परिजन भी बदहवास हैं।