रायबरेली। स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के तहत गांवों को मॉडल बनाने की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है। सहायक विकास अधिकारियों की लापरवाही के कारण गांवों में काम शुरू नहीं हो पा रहे हैं। जिले में 1557 गांवों को मॉडल बनाने के लिए चिन्हित किया गया है, लेकिन अब तक 58 गांवों में ही काम कराया गया है। समीक्षा में प्रगति खराब मिलने पर डीपीडीओ ने सभी 18 ब्लॉकों के सहायक विकास अधिकारियों को कठोर चेतावनी दी है।
जिले में गांवों में खाद के गड्ढे, वाटर टैंक सहित अन्य काम कराकर गांवों को ओडीएफ करके मॉडल करने का प्रयास किया जा रहा है। जिले में 1557 गांवों को इसके लिए चिन्हित किया गया है। इसके लिए दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं, लेकिन सहायक विकास अधिकारियों की लापरवाही के कारण गांवों में काम नहीं हो पा रहे हैं। इससे शासन की मंशा भी पूरी नहीं हो पा रही है।
समीक्षा में जिले की खराब प्रगति मिलने पर डीपीआरओ ने जगतपुर, ऊंचाहार, सलोन, महराजगंज, बछरावां, सरेनी, लालगंज, रोहनियां, डलमऊ, अमावां, हरचंदपुर, सतांव, डीह, छतोह सहित सभी 18 ब्लॉकों के सहायक विकास अधिकारियों को कठोर चेतावनी दी है। सभी को लक्ष्य के सापेक्ष काम में तेजी लाने के आदेश दिए हैं। ऐसा न करने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। डीपीआरओ गिरीश चंद्र ने बताया कि लापरवाही में सभी एडीओ पंचायत को कठोर चेतावनी दी गई है। प्रगति में सुधार न आने पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।