यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'चक्रव्यूह में फंसे नेताजी' की कहानी। इसके अलावा 'शायद किस्मत जाग जाए' और '...अभी तो यह झांकी है' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
चक्रव्यूह में फंसे नेताजी
सूबे में इन दिनों चुनावी जंग का मैदान सजा है। लिहाजा कई सियासतदां कमर कसके मैदान में उतर चुके हैं। ऐसे ही एक नेता जी भी अपनी जीत पक्की करने के लिए अपना मूल संगठन छोड़ भगवा खेमे से सेटिंग करके टिकट ले आए। लिहाजा विपक्ष ने भी नेताजी के लिए ऐसा चक्रव्यूह तैयार कर दिया कि नेता जी फंस गए हैं। विपक्ष ने लंबे समय से भगवा की सेवा करने वाले नेताजी को ही अपने पाले में करके मैदान में उतार दिया है। ऐसे में शिक्षक से भगवाधारी बने नेताजी की टेंशन बढ़ गई है, क्योंकि साइकिल की सवारी नेताजी अपने पुराने वोटरों को साथ ले गए तो नेताजी का चक्रव्यूह से निकलना मुश्किल हो जाएगा।
शायद किस्मत जाग जाए
प्रदेश में खेल वाले विभाग में अधिकारियों के प्रमोशन की फाइल फिर ‘तकनीकी कारणों’ में उलझ गई। हाल में शासन स्तर पर डीपीसी हुई लेकिन किसी के प्रमोशन पर सहमति नहीं बन सकी। बड़े साहब ने भी तकनीकी अड़चन का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। वैसे यहां प्रमोशन की राह पहले भी आसान नहीं रही है। अब विभाग में यह कहावत चल पड़ी है कि नौकरी मिल जाए तो गनीमत, प्रमोशन मिल जाए तो किस्मत! डीपीसी होती है, चर्चा होती है, पेच निकलता है और मामला फिर फाइलों की दुनिया में लौट जाता है। लगता है यहां प्रमोशन कोई पद नहीं, लंबी साधना है... धैर्य रखिए, शायद अगली डीपीसी में किस्मत जाग जाए!
... अभी तो यह झांकी है
कमल का फूल उगाने के लिहाज से बंजर बन चुके जिले में भगवा दल के जिला मुखिया और एक पुराने नेताजी के बीच गुत्थमगुत्था का वीडियो खूब वायरल हो रहा है। चर्चा है कि जिले के प्रभारी की मौजूदगी में हुआ यह 'युद्ध' ऐसे ही नहीं हुआ। इसकी पटकथा पहले से तैयार थी। बहाना सिर्फ मंच से नाम न लेने का भले ही बनाया जा रहा है, लेकिन इसका असली कारण हाल में जारी हुए पदाधिकारियों की सूची है। पुराने नेताजी पहले तो जिलाध्यक्ष की दौड़ से बाहर हो गए, अब पदाधिकारियों की सूची में भी उन्हें साजिशन बाहर करा दिया गया। बहरहाल दोनों के बीच हुए जूतमपैजार को लेकर लोग अब यही कह रहे हैं कि अभी तो यह झांकी है, अभी कई और जिलों में ऐसे नजारे देखने को मिल सकता है।