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सुना है क्या: 'टिकट के बढ़े रेट' की कहानी, साथ ही 'मंत्रीजी के शौक और सब संरक्षण का खेल है' के किस्से

Sun, 06 Sep 2026 11:03 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'टिकट के बढ़े रेट' की कहानी। इसके अलावा 'मंत्रीजी के शौक' और 'सब संरक्षण का खेल है' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

टिकट के बढ़े रेट

सत्ता के साझीदार एक दल के कई माननीय बड़े सियासी धमाके की तैयारी में हैं। खास वजह यह है कि दल ने टिकट का रेट बढ़ा दिया है। ऐसे में कई माननीयों ने विरोध के तौर पर अपने-अपने वाहनों से दल का झंडा हटा दिया है। चर्चा है कि पिछले चुनाव में दल के सिंबल पर चुनाव लड़ने वाले कई माननीय दूसरे सहयोगी दल के सिंबल पर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गए हैं। चर्चा तो यह भी है कि माननीयों का यह तेवर देख दल के मुखिया उलझन में हैं कि टिकट का रेट कम करें या नए खरीदार खोजें।

मंत्रीजी के शौक

मंत्रीजी इन दिनों नजदीकी विधायकों और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच अपने शौक को लेकर चर्चा में हैं। ये शौक हैं-सुबह से राजनीति के साथ धुआं छोड़ना और महिलाओं से दोस्ती। अब तो साथ में रहने वाले विधायक भी कहने लगे हैं कि शायद ही कोई जिला हो, जहां मंत्रीजी की महिला मित्र न हों। वे आशंका जता रहे हैं कि कहीं किसी दिन राजनीतिक या गैर राजनीतिक बखेड़ा खड़ा न हो जाए।

सब संरक्षण का खेल है

सूबे के एक पुलिस कमिश्नरेट में नशे के कारोबार का बड़ा अड्डा पकड़ा गया है। हैरानी ये है कि इस पर कार्रवाई खुद संबंधित कमिश्नरेट पुलिस ने नहीं बल्कि मुंबई पुलिस ने की। सैकड़ों किलोमीटर दूर की पुलिस को इनपुट मिल गया लेकिन स्थानीय पुलिस अनजान बनी रही। हकीकत में ऐसा नहीं है। ये ड्रग्स सिंडिकेट मिलीभगत से चल रहा था। खाकी का संरक्षण था। इसलिए कारोबार करने वालों को कोई डर नहीं था। इस नाकामी में कमिश्नरेट के हर पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी है लेकिन बड़े साहब आनन-फानन मामूली कार्रवाई कर सबकुछ रफादफा कर माहौल शांत करने की कोशिश में जुट गए हैं।

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