सत्तारूढ पार्टी के खासमखास माने जाने वाले अफसर की करीब नौ महीने बाद शासन की मुख्य धारा में वापसी हो गई।
जब उन्हें अचानक हटाया गया था, तब उन्हें मालूम तक नहीं चल पाया था।
कई दिनों-हफ्तों तक वे हर किसी से पूछते रहे कि आखिर कारण तो मालूम पड़े। अब वापसी हो गई, तो भी यही सवाल उन्हें सता रहा है।
उनके नजदीकी मानते हैं कि उद्योग में तो किसी तरह काम चल सकता था, कानून-व्यवस्था संभालने में तो रोजाना इम्तिहान है।
किसी भी दिन 19-20 हो गया, तो नई आफत आन पड़ेगी।