एक वरिष्ठ आईएएस अफसर सूबे की नौकरशाही के शीर्ष पद के दावेदार हैं।
एक अन्य अफसर जो उनसे सीनियर तो हैं ही साथ ही दो अहम पदों पर विराजमान हैं। यह बात शीर्ष पद के दावेदार महाशय को खटकती है।
उन्हें लग रहा है कि आने वाले दिनों में यह अफसर पंचम तल पर भी पहुंच सकते हैं। उन्हें उनके मूल पद के साथ पहले सौंपे गए अतिरिक्त काम के अलावा हाल में कई और काम सौंप दिए गये।
अब वे हर आने-जाने वाले को यह समझाने की कोशिश में लगे हैं कि इस चुनाव में सरकार का बंटाधार ऐसे ही नहीं हुआ है।
जो काम अलग-अलग लोगों में बंटा होना चाहिए, वह कुछ ही लोगों को दे दिया गया। वह भी ऐसे लोगों को जिनकी निष्ठा पहले से ही संदेह के घेरे में है।
बेचारे हर संभव तरीके से अपनी बात ऊपर तक पहुंचाने के लिए हाथपैर मार रहे हैं लेकिन सरकार उनकी बात को तवज्जो नहीं दे रही है।