भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी की मौजूदगी में आयोजित बैठक में अलीगढ़, मेरठ, गाजियाबाद, अयोध्या, कानपुर,बरेली और शाहजहांपुर नगर निगम महापौर प्रत्याशी, पार्षद प्रत्याशी और 95 नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी को लेकर मंथन हुआ।
नगरीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण में भी भाजपा परिवारवाद से दूर रहने का प्रयास करेगी। किसी भी मंत्री, सांसद या विधायक के परिवारजन को प्रत्याशी नहीं बनाने की सैद्धांतिक सहमति बनी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार शाम सीएम आवास पर आयोजित भाजपा कोर कमेटी की बैठक में सात नगर निगम के महापौर, पार्षद और 95 नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया गया।
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी की मौजूदगी में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में अलीगढ़, मेरठ, गाजियाबाद, अयोध्या, कानपुर,बरेली और शाहजहांपुर नगर निगम महापौर प्रत्याशी, पार्षद प्रत्याशी और 95 नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी को लेकर मंथन हुआ। पैनल में शामिल प्रत्येक प्रत्याशी के सामाजिक समीकरण और राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चा की गई। करीब एक घंटे से अधिक की चर्चा के बाद अंतिम पैनल तैयार किया गया। कोर कमेटी ने प्रयास किया है कि निकाय चुनाव में अगड़ी, पिछड़ी और दलित वर्ग की सभी जातियों को किसी न किसी निकाय में प्रतिनिधित्व दे दिया जाए। वहीं अल्पसंख्यक बहुल निकायों को खाली छोड़ने की जगह वहां मुस्लिम प्रत्याशी भी उतारे जाएं।
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह शनिवार को पैनल लेकर दिल्ली जाएंगे। दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और महामंत्री संगठन बीएल संतोष से चर्चा के बाद प्रत्याशी की घोषणा की जाएगी। बैठक में निकाय चुनाव में प्रचार अभियान, चुनाव प्रबंधन को लेकर भी चर्चा हुई। सभी नगर निगमों के साथ बड़ी नगर पालिका परिषद में सीएम योगी, डिप्टी सीएम केशव और ब्रजेश पाठक की सभाएं होंगी। बैठक में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह भी मौजूद थे।
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भाजपा की मुसीबत बढ़ाएंगे बागी
पहले चरण के चुनाव में नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में बड़ी संख्या में भाजपा के बागी उम्मीदवार मैदान में डटे रह गए हैं। ये उम्मीदवार किसी भाजपा नेता व जनप्रतिनिधि के रिश्तेदार हैं तो किसी के करीबी कार्यकर्ता हैं। चुनाव मैदान में बचे भाजपा के बागी पार्टी प्रत्याशी की मुसीबत बढ़ा सकते हैं। पार्टी के वोट बंटने से चुनाव परिणाम भी प्रभावित हो सकता है। सरकार और संगठन के शीर्ष लोग इसको लेकर चिंतित है। प्रत्येक बड़े निकाय में इस समस्या का हल निकालने के लिए स्थानीय स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रयास किया जाएगा।