हाथरस पुलिस की करतूत के चलते राज्य सरकार को एक लाख रुपये हर्जाना भरना पड़ा है।
अपहरण, दुराचार और एसिड अटैक के बाद किशोरी की मौत होने के मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यह हर्जाना ठोका था।
यह रकम आरोपी सब इंस्पेक्टरों की पगार से लेकर पीड़ित परिवार को दी गई। वर्ष 2012 में किशोरी का अपहरण हुआ था।
किशोरी के पिता का आरोप था कि जब वह अपहरण की रिपोर्ट लिखाने गया तो हाथरस जंक्शन थाना पुलिस ने 20 हजार रुपये मांगे।
पुलिस किशोरी की तलाश में निष्क्रिय बनी रही जिसका नतीजा खौफनाक रूप में सामने आया।
आयोग ने मामले की जांच कर स्थानीय पुलिस की भूमिका तय कर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के साथ ही पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये बतौर हर्जाना भुगतान करने को आदेश दिया था।