बुजुर्ग कह गए हैं कि नासमझ दोस्त से समझदार दुश्मन अच्छा होता है। यह कहावत सपा पर फिट बैठती दिख रही है।
अब अपने हरदोई वाले नरेश भैया को ही लें। सियासत का श्रीगणेश कांग्रेस के साये में करने वाले ये जनाब चारों धाम घूमकर फिर समाजवादी हो गए हैं।
पिछले दिनों उन्होंने नेताजी की नजरों में अपने नंबर बढ़वाने के लिए नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए ‘चाय बेचने वाला ...’ बयान दे डाला।
भाजपाई तो भाजपाई, समाजवादी विचारों के लिए जिंदगी खपा देने वाले भी हैरान हैं। उनका कहना है कि नेताजी के इस नासमझ दोस्त ने मोदी पर नहीं, समाजवादी विचार पर ही हमला बोल दिया है।
समाजवाद का सिद्धांत ही यही है कि गरीबों और पिछड़ों को सत्ता में हक मिले। पर यहां तो अपने ही भैया पूरे सिद्धांत पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।