पहलवानी के मास्टर मुलायम सिंह यादव सियासत के अखाड़े में कुछ कम नहीं हैं।
परिक्रमा पर पराक्रम के बहाने यह बात एक बार फिर साबित हो गई है। ऐसा झटका दिया कि अशोक सिंघल जैसे उस्ताद धोखा खा गए।
मुलायम ने न सिर्फ सिंघल व संतों से अपनी तारीफ करवा दी बल्कि संतों के बीच दीवार भी खड़ी कर दी। पहले उन्होंने संतों की परिक्रमा को इजाजत दे दी।
विहिप, मुलायम व अखिलेश सरकार की तारीफ करते हुए आगे निकल गई तो फिर मुस्लिम हितैषी छवि को धार देने के लिए उन्होंने परिक्रमा पर रोक और सख्ती का ऐसा धोबी पाट दांव चला कि विहिप नेता चारो खाने चित हो गए।
बेचारों को इज्जत बचाने के लाले पड़ गए। चुप बैठ जाते तो किरकिरी होती। करते भी तो क्या, जैसे-तैसे इज्जत बचानी पड़ी।