रविशंकर गुप्ता
केस-1
काशीश्वर इंटर कॉलेज मोहनलालगंज में शिक्षक और विद्यार्थियों का अनुपात पूरा नहीं है। यहां नामांकन संख्या 2600 के पार है, लेकिन शिक्षकों की संख्या 18 है। यहां गणित व विज्ञान में तीन-तीन शिक्षक हैं लेकिन छात्र संख्या के अनुसार कम हैं। ऐसे में शिक्षकों पर पढ़ाने का भार भी ज्यादा है। प्रयोगशाला में संसाधनों का अभाव है, इस स्थिति में प्रैक्टिकल भी नहीं हो पाते हैं। यहां काफी संख्या में ऐसे भी छात्र हैं जो बोर्ड परीक्षा से पहले गणित व विज्ञान जैसे विषयों की कोचिंग बाहर से पढ़ते हैं।
केस - 2
गिरधारी सिंह इंटर कॉलेज कंट्रोलर के हवाले है। छात्र संख्या इतनी भी नहीं है कि अलंकार योजना के लिए आवेदन कर सकें। इस समय 225 बच्चों पर 25 शिक्षकों की तैनाती है, लेकिन गणित का शिक्षक एक भी नहीं है। प्रधानाध्यापक श्रवण कुमार ने बताया कि जो व्यवस्था उसी में काम चल रहा है। विज्ञान प्रयोगशाला दुरुस्त नहीं है। ऐसे में पढ़ाई मौखिक तो होती है लेकिन प्रैक्टिकल नहीं हो पाते हैं।
केस-3
नवजीवन इंटर कॉलेज में प्रयोगशाला दुरुस्त है और विद्यार्थियों की संख्या 1800 के पार है। यहां शिक्षकों की संख्या 30 है लेकिन विज्ञान व गणित के शिक्षक तीन-तीन हैं जो कि छात्र संख्या के अनुसार कम है। कॉलेज प्रधानाध्यापक हर गोविंद मिश्रा बताते हैं कि बीएड इंटर्नशिप वाले अभ्यर्थियों से काम चला रहे हैं।
लखनऊ। किसी विद्यालय में 2600 विद्यार्थियों पर विज्ञान व गणित के छह शिक्षक हैं तो कहीं 225 बच्चों पर 25 शिक्षकों की संख्या होने के बावजूद गणित का कोई शिक्षक ही नहीं है। यह हाल है राजधानी के सहायता प्राप्त माध्यमिक (एडेड) कॉलेजों का।
इसके पीछे मुख्य वजह है शिक्षकों के समायोजन की योजना तो बनी लेकिन यह परवान नहीं चढ़ सकी। इसी वजह से कहीं बच्चे ज्यादा हैं तो शिक्षक कम हैं और कहीं शिक्षक कम हैं तो बच्चे ज्यादा हैं। इस स्थिति में बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता क्या होगी इसका अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है।
यूपी बोर्ड परीक्षाएं पांच माह बाद है। ऐसे में परीक्षा में विद्यार्थियों का प्रदर्शन कैसा होगा, यह अंदाजा लगाया जा सकता है। अमर उजाला को पड़ताल में पता चला कि हर बार यूपी बोर्ड परीक्षा से पहले बच्चों को कोचिंग तक लगवानी पड़ रही है, तब जाकर परीक्षा के लिए तैयारी हो पाती है। गणित व विज्ञान जैसे अहम विषयों में समय से पढ़ाई न हो होने से बोर्ड परीक्षा में परिणाम का प्रतिशत भी लगातार गिर रहा है।
कोट
समायोजन की प्रक्रिया शुरू हो तो मिले राहत
जब तक शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया शुरू नहीं होगी तब तक छात्र और शिक्षक अनुपात सही नहीं होगा। प्रयोगशाला में जहां दिक्कत है, वहां प्रबंधक व प्रधानाध्यापक को ध्यान देना चाहिए।
- राकेश कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक
कोट
सरकार निकाले हल
सहायता प्राप्त कॉलेजों में विज्ञान और गणित के शिक्षकों की कमी है। इसके चलते यूपी बोर्ड परीक्षा में छात्रों का बेहतर परिणाम नहीं आ पाता है, इसका हल सरकार को निकालना चाहिए।
- अनिल शर्मा, जिलाध्यक्ष - माध्यमिक शिक्षक संघ