रायबरेली। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ वंचित किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से सोमवार से ग्राम पंचायतों में कैंप का शुभारंभ हुआ। पहले दिन 108 स्थानों पर कैंप लगे। हालांकि जिम्मेदारों के उदासीन रवैये से यह कैंप महज खानापूर्ति तक सिमट कर रह गए। जिस पोर्टल से समस्याएं दूर करनी थी, वह कहीं धीमी गति से चला तो कहीं इंटरनेट रोड़ा बना रहा। किसानों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। वहीं, कैंप से डाक विभाग के कर्मचारी और लेखपाल सुबह मुंह दिखाकर दिन भर गायब रहे। राही के किसान रामकेवल, माताबदल, आशीष तिवारी ने बताया कि कैंप में डाक विभाग के कर्मचारी और लेखपाल नदारद रहे। लंबे इंतजार के बाद किसानों को बैरंग लौटना पड़ा। इसी तरह सतांव के राम आशीष तिवारी, रंजीत सोनकर व अन्य ने बताया कि सर्वर में दिक्कत से एक-एक शिकायत के निस्तारण में आधा से एक घंटे का समय लगा।
पहले दिन हरचंदपुर ब्लॉक क्षेत्र के गुल्लूपुर, लालगंज क्षेत्र के सैदापुर, गोडा, बाजपेयीपुर, राही ब्लॉक क्षेत्र के राही, सतांव ब्लॉक क्षेत्र के देदौर, कोरिहर, सतांव, जोहवाशर्की, शिवगढ़ क्षेत्र कै बैंती समेत 108 जगह कैंप लगा। वहीं, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी अभयराज गुप्ता ने ममुनी में लगे कैंप का निरीक्षण किया।
वर्ष 2019 में शुरू हुई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से चार लाख 50 हजार से ज्यादा किसानों ने लाभ उठाया, लेकिन बीच में आधार लिंक, भूलेख के दस्तावेज, बैंक खातों की त्रुटियों की वजह से बड़ी संख्या में किसान योजना से वंचित रह गए। इन त्रुटियों को दूर करने समेत नए किसानों को योजना का लाभ दिलाने के लिए एक बार फिर ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर लगाए जा रहे हैं।
कैंप में कृषि विभाग के तकनीकी सहायक, लेखपाल, ग्राम पंचायत अधिकारी, डाक विभाग के कर्मचारी और ग्राम प्रधान के अलावा जन सेवा केंद्र प्रभारी को उपस्थित रहना है। संबंधित तहसीलदार कैंप की निगरानी करेंगे। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी व कर्मचारी रुचि नहीं ले रहे हैं। प्रभारी उप कृषि निदेशक विनय सिंह ने बताया कि किसानों की समस्याएं दूर कराई जा रही हैं। पोर्टल धीमा चल रहा है। पहले दिन बछरावां क्षेत्र के सेंहगों पश्चिम गांव कैंप का जायजा लिया है। कैंप से जो लोग गायब रहे, जांच के बाद उनके विभागाध्यक्षों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।