अरे...वो देखो चांद को ग्रहण लग गया। जरा मुझे भी देखने दो...हटो...वाह, अद्भुत है खगोलीय घटनाओं का यह चक्र भी। आओ...तुम भी देखो, साल का ये आखिरी चंद्रगहण है। अरे! मुझे तो बिना दूरबीन के भी चांद पर लगा ग्रहण देख रहा है। कुछ ऐसी ही उत्सुकता, ऐसे ही संवाद चल रहे थे, टीले वाली मस्जिद के पास पक्के पुल पर लगाए गए टेलीस्कोप से चंद्रग्रहण का नजारा देखने आने वाले लोगों के बीच। ऐसा ही कुछ नजारा मंगलवार को पंचवटी घाट, अहिमर्दन पातालपुरी हनुमान मंदिर आदि जगहों पर भी था। इस अवसर पत तीन टेलीस्कोप लगाए गए। इस मौके पर लोगों की मदद के लिए इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला, विज्ञान व प्रौद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित यूपी अम्चोर एस्ट्रोनामर्स क्लब के सदस्य मौजूद रहे।
धुंध की वजह से देर से दिया दिखाई
वैज्ञानिक अधिकारी इंदिरा गांधी नक्षत्र शाला सुमित श्रीवास्तव ने कहा कि मंगलवार को घटित खगोलीय घटना लखनऊ में आंशिक चंद्रग्रहण के रूप में देखी गई। आंशिक चंद्रग्रहण दोपहर में 2.39 बजे से शुरू हुआ और शाम 6:19 बजे तक चला चूंकि यहां पर चंद्रोदय का समय शाम को 5:16 बजे था, अत: लखनऊ में चंद्रग्रहण का का काल 5:16 बजे से शाम 6:19 बजे तक ही दिखाई दिया। हालांकि धुंध की वजह से पौने छह बजे के बाद लोगों को दिखाई देना शुरू हुआ। लखनऊ में चंद्रग्रहण की अवधि अधिकतम 63 मिनट की थी। इसके बाद उपछायी चंद्रग्रहण का समापन 7:26 बजे हुआ। इस वर्ष का यह अंतिम चंद्रग्रहण था।
ग्रहों के भी हुए दीदार
एस्ट्रोनामर्स क्लब के सदस्यों ने चंद्रग्रहण के बाद टेलीस्कोप को शनि, बृहस्पति ग्रह की तरफ घुमा दिया और लोगों को इसका अवलोकन करवाया।
अगला चंद्र ग्रहण
वैज्ञानिक अधिकारी के मुताबिक, अब अगला चंद्रग्रहण निम्न तारीखों और वर्ष में पड़ेगा।
06 मई 2023: उपछायी चंद्र ग्रहण
29 अक्तूबर 2023 आंशिक चंद्रग्रहण
08 सितंबर 2025 पूर्ण चंद्र ग्रहण
ग्रहों-तारों की दुनिया को समझने की ललक ने बना दिया एस्ट्रोफोटोग्राफर
पक्का पुल पर स्वप्निल रस्तोगी, होजेफा शकील, उत्कर्ष वाजपेयी जैसे युवाओं के समूह के कैमरे क्लिक...क्लिक...क्लिक कर रहे थे। एक-दो नहीं बल्कि एक बार 36 क्लिप बना डाली स्वप्निल व उत्कर्ष ने। निजी कंपनी में कार्यरत स्वप्निल कहते हैं कि उन्होंने ग्रहों-तारों की दुनिया अच्छी लगती है, बस जब भी मौका मिलता है तो फोटोग्राफी करते हैं। राजाजीपुरम निवासी उत्कर्ष वाजपेयी यूं तो एमिटी से लॉ की पढ़ाई कर रहे हैं। कहते हैं कि फोटोग्राफी और एस्ट्रोफोटोग्राफी का शौक है, सात-आठ साल से कर रहे हैं। इसी शौक ने उन्हें तारों को जन्म देने वाली निहारिकाओं पर शोध के लिए प्रेरित किया।