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कोरोना किट खरीद का एसआईटी ने पंचायतवार ब्योरा मांगा 

Sat, 19 Sep 2020 12:08 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
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कोरोना संक्रमण रोकने के लिए ग्राम पंचायतों में पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर (कोरोना किट) खरीद में हुई अनियमितता की जांच कर रही एसआईटी ने अब जिलों से ग्राम पंचायतवार जानकारी मांगी है। इसके लिए 20 कॉलम का प्रारूप पत्र बनाकर भेजा गया है। एसआईटी ने जो सूचनाएं मांगी है वे जिलों को इसी प्रारूप पर भेजनी होगी।
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पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर की खरीद में अनियमितता की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की है। एसआईटी ने 11 जून को जिलाधिकारियों से 12 बिदुंओं पर जानकारी मांगी थी। अभी तक भी सभी जिले जानकारी नहीं दे पाए हैं। इस बीच मेडिकल किट की खरीद की तह तक जाने के लिए रेणुका कुमार ने जिलों से ग्राम पंचायतवार जानकारी मांगी है।

जिलाधिकारियों को 20 कॉलम वाला परफॉर्मा भेजा गया है। इसमें पंचायत व ब्लॉक के नाम के साथ पूछा गया है कि पंचायतों ने पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर की खरीद खुद की अथवा ब्लॉक या जिला स्तर से खरीद की गई। यह खरीद राज्य वित्त आयोग से की गई, 14वें वित्त आयोग या ग्राम पंचायत की किसी अन्य निधि से। खरीद किट के रूप में की गई या अलग-अलग सामान था। किट में पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर व सैनिटाइजर के लिए अलावा और क्या था। कुल कितनी किट खरीदी, प्रति किट क्या दर थी, अलग-अलग खरीद हुई तो प्रति आइटम क्या दर थी।
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एसआईटी ने यह भी पूछा है कि पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर किस रेट पर खरीदे गए। इनके वर्कआर्डर में कितनी राशि निहित है, अब तक कितना भुगतान हुआ, किन फर्मों से खरीद की गई, उनके जीएसटी नंबर, ऑक्सीमीटर व थर्मामीटर के ब्रांड, उनकी विशिष्टियां यदि कोई हों, यदि भुगतान रोका गया तो उसकी राशि समेत विवरण भी देना होगा।

फंस रहे अधिकतर जिले: 
अलीगढ़ की सीडीओ ने पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर की खरीद 2800 रुपये में की थी। अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज मनोज कुमार ने अपेक्षा जताई थी कि इससे ज्यादा दर पर खरीद न की जाए। उन्होंने अपने पत्र में अलीगढ़ की सीडीओ का मोबाइल नंबर भेजते हुए जरूरत होने पर मेडिकल किट खरीद मामले में उनसे सलाह लेने को कहा था।

अधिकतर जिलों ने उनकी सलाह को नजरंदाज किया और ज्यादा दरों पर भुगतान किया। पंचायतों पर दबाव बनाकर खरीद कराई गई। कई ब्लॉकों में सारी खरीद एक फर्म से ही हो गई। चीनी ब्रांड से भी परहेज नहीं किया गया। 
 
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