पत्रकारिता एक गतिविधि है न कि अपराध। शायद यहां पत्रकार को फ्रीडम नहीं है। मैं हाथरस में कवरेज करने गया था, लेकिन पुलिस ने मुझे पीएफआई का सचिव बना दिया। इसके बाद 28 माह की जेल काटी और कॅरिअर के साथ मां को भी खो दिया। फिलहाल आरोपों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा। यह बातें कथित पत्रकार कप्पन सिद्दीक ने गुरुवार को जेल से रिहा होने के बाद कहीं।
भावुक होकर कप्पन ने बताया कि बेटा केरल के प्रियदर्शनी कॉलेज मे बीसीए द्वितीय वर्ष का छात्र है। उसकी पढ़ाई प्रभावित हुई तो पत्नी रिहाना ने जीविकोपार्जन के लिए काफी मुसीबतें झेलीं। उसने बताया कि जेल में रहने के दौरान उसे भाषाई दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
जिला जेल की सर्किल दो के हाता 6 की बैरक नंबर 39 में बंद रहने के दौरान उसे मुकदमे से संबंधित जानकारी नहीं मिल पाती थी। मलयालम में उसे जेलकर्मियों से बात करने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए अंग्रेजी बोलने वाला एक राइटर दिलाने के लिए जेल प्रशासन से गुहार लगाई। इस पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक आशीष तिवारी ने जेलर व डिप्टी जेलर को निगरानी में लगाने के साथ परेड में उसकी समस्या सुनी और समाधान का आश्वासन दिया।