आधा गला बदमाशों ने रेत दिया था। सांस की नली और धमनियां तक कट गईं। यानी मौत के वो बेहद करीब पहुंच गई थी। 16 दिन वेंटिलेटर पर रही, पर हिम्मत नहीं हारी। आखिर डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई और श्रुति डे जिंदगी की जंग जीत गई।
उसे अस्पताल से शनिवार को ही छुट्टी मिल गई। अब वो सामान्य जिंदगी जी सकेगी। डॉक्टर बोले-उसे इलाज और दवा के साथ लोगों की दुआएं काम आईं।
श्रुति महज 14 साल की बच्ची। इंदिरानगर में 29 जुलाई को घर में घुसे बदमाशों ने उसकी मां की हत्या कर दी। यही नहीं धारदार हथियार से उसका भी गला रेत दिया। बदमाश उसे मरा हुआ समझकर छोड़ गए। लोहिया अस्पताल के सीएमएस डॉ. ओंकार यादव बताते हैं कि 29 को रात 9 बजे जब श्रुति को लाया गया तो उसका आधा गला कटा हुआ था।
सांस की नली यानी ट्रैकिया कट गई थी। कई धमनियां भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त थीं। जिंदगी बचाने के लिए वक्त बहुत कम था। सांस की नली को फौरन रिपेयर किया जाना बेहद जरूरी था। तुरंत उसे ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट कर दिया गया। डॉ. एके द्विवेदी और उनकी टीम इस काम में जुट गई।