प्रदर्शन करते शिया समुदाय के लोग।
लखनऊ। शिया-सुन्नी समझौते से अलग प्रतिबंधित जुलूस मदहे सहाबा निकालने की शनिवार को कोशिश कर रहे शिया समुदाय के लोगों को पुलिस ने आसिफी इमामबाड़े के मुख्य द्वार पर रोक लिया। तंजीम-ए-मिल्लत के बैनर तले शिया समुदाय के लोग आसिफी इमामबाड़े में एकत्र हुए थे। उन्होंने इमामबाड़ा परिसर से जुलूस की शक्ल में बाहर आने की कोशिश की।
भारी पुलिस बल व प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें इमामबाड़े का मुख्य द्वार बंद कर वहीं रोक लिया। इसके बाद लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी जुलूस हजरतगंज स्थित इमामबाड़ा शाहनजफ तक ले जाने की मांग कर रहे थे। तंजीम के महासचिव प्रिंस इकबाल मिर्जा ने उलमा की मौजूदगी में मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। वहीं ऑल इंडिया शिया यूथ फाउंडेशन ने रौजा-ए-काजमैन से जुलूस ए मोहम्मदी निकालने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने वही रोक लिया। जुलूस में शामिल लोग जुलूस को अमीनाबाद स्थित झंडे वाला पार्क ले जाने की मांग कर रहे थे।
शिया समुदाय ने मनाया विलादत का जश्न
लखनऊ। शिया समुदाय ने शनिवार को पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब और छठे इमाम जाफर-ए-सादिक की यौम-ए-पैदाइश का जश्न मनाया। इमामबाड़े, कर्बला और घरों में नज्र का आयोजन कर नजराना-ए-अकीदत पेश की गई। कई जगहों पर महफिलों का आयोजन हुआ।
पाटानाला स्थित इमामबाड़ा हकीम मोहम्मद तकी में महफिल को मौलाना यासूब अब्बास ने खिताब किया। आसिफी इमामबाड़े में महफिले मीलाद को मौलाना मीसम जैदी ने खिताब किया। महफिल की अध्यक्षता करते हुए मौलाना यासूब अब्बास ने पैगम्बर मोहम्मद साहब और इमाम जाफरे सादिक की सीरत पर रोशनी डाली। मौलाना सदफ जौनपुरी, मौलाना मुमताज अली कौसर हुसैन, रहबर हुसैन, नय्यर मजीदी, सादिक़ हुसैन, ज़र्रे लखनवी, खुर्शीद रजा फ़तेहपुरी, अहसन सईद ने नातिया कलाम पेश किए। वहीं, रौजा-ए-काजमैन में आयोजित महफिल के बाद शायरों ने अपने कलाम पेश किए