लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के 28वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख एल मांडविया ने डिग्री पाने वाले डॉक्टरों से कहा कि चिकित्सा कोई व्यवसाय नहीं है बल्कि यह समाज के प्रति सेवा है। हमारी संस्कृति में दरिद्र और रोगी को नारायण माना गया है। इसलिए हमारी संस्कृति में अस्पताल मंदिर और डॉक्टर उसका पुजारी है। नए डॉक्टरों को इसी भाव से समाज की सेवा को वरीयता देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज आपकी एक जीवनशैली संपन्न हुई और दूसरी शुरू हुई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वस्थ समाज से ही स्वस्थ राष्ट्र और सफल राष्ट्र बनता है। वर्ष 2047 तक हमें विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करना है। इसके लिए सभी को समर्पण से काम करना होगा। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग में धन्वन्तरि की फोटो लगाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हमें गुलामी के प्रतीकों को तोड़कर आगे बढ़ना है। संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने वार्षिक रिपोर्ट पेश की। मुख्य सचिव और संस्थान की गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष दुर्गा शंकर मिश्र ने संस्थान के सभी उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। डीन प्रो. शालीन कुमार ने धन्यवाद भाषण दिया। इस मौके पर संस्थान के रजिस्ट्रार कर्नल वरुण बाजपेयी और शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।
अवसर मिलने पर चुकाएं समाज का ऋण
संस्थान की कुलाधिपति और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेधावियों से कहा कि इस सफलता में माता-पिता के साथ ही समाज का बहुत बड़ा योगदान है। मौका मिलने पर इस ऋण को जरूर चुकाना चाहिए। उन्होंने इलाज के साथ ही बीमारी रोकने के प्रयास करने के लिए भी कहा।
प्रदेश में अब नौ महिला कुलपति
राज्यपाल ने कहा कि आमतौर पर ज्यादातर दीक्षांत समारोह में 80 फीसदी पदक बेटियां ले जाती हैं। इस लिहाज से एसजीपीजीआई अलग रहा। यहां पर ज्यादा पदक बेटों ने जीते हैं। अगले साल 50 फीसदी पदक बेटियों के नाम होने चाहिए। कुलाधिपति ने कहा कि महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। यही वजह है कि आज प्रदेश में नौ विश्वविद्यालयों में कुलपति महिलाएं हैं।
मरीजों से अच्छा व्यवहार देगा चिकित्सा में नाम
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि डॉक्टरों को मरीजों के प्रति अच्छा व्यवहार करना चाहिए। जितना अच्छा व्यवहार वे मरीजों से करेंगे, उतना ही चिकित्सा के क्षेत्र में उनका नाम होगा। उन्होंने बताया कि हर जनपद में एक मेडिकल कॉलेज का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। अब हिंदी में भी एमबीबीएस की किताबें मौजूद हैं। इससे हिंदी भाषी क्षेत्र के मेधावी भी डॉक्टर बन पाएंगे। चिकित्सा राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि डिग्री पाने वाले डॉक्टरों को सरकारी क्षेत्र से भी जुड़ना चाहिए।
शिक्षा, शोध और सार्वजनिक स्वास्थ्य से दुरुस्त होगी व्यवस्था
महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की कुलपति ले. जनरल डाॅ. माधुरी कानितकर ने दीक्षांत भाषण देते हुए कहा कि हमें सोचना होगा कि स्वास्थ्य सेवाएं बीमार क्यों हैं। इन सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए हमें शिक्षण, शोध और सार्वजनिक स्वास्थ्य तीनों को सुदृढ़ करना होगा। हम अपने उपकरण खुद बनाएं। 20 फीसदी लागत में आधुनिक वेंटिलेटर बनाकर हम गांव-गांव में इसकी सुविधा दे सकते हैं। उन्होंने उत्तीर्ण विद्यार्थियों और पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि सक्षम और निरामया भारत ही हमारा अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।