लखनऊ। प्राइवेट स्कूली वैन से हादसा होने पर अब स्कूल प्रबंधन अपना पल्ला नहीं झाड़ पाएंगे। स्कूली व अनुबंधित वाहनों की तरह बच्चों को लाने-ले जाने वाली प्राइवेट वैन की जिम्मेदारी भी स्कूल प्रबंधन की होगी। प्राइवेट वैन का डाटा स्कूल प्रबंधन को रखना होगा। वाहनों की फिटनेस से लेकर सेफ्टी-सिक्योरिटी तक की जांच करवाई जाएगी। अभिभावकों को भी सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शुक्रवार को एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर बैठक हुई। डालीगंज स्थित संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) के दफ्तर में हुई बैठक में पुलिस, शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग, स्कूल प्रबंधन और स्कूली वाहनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें स्कूल प्रबंधन को कई निर्देश दिए गए।
9 अगस्त को क्षमता से अधिक बच्चों को ले जा रही निजी वैन शहीद पथ पर पलट गई थी। हादसे में बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। स्कूल प्रबंधन ने मामले से पल्ला झाड़ लिया था।
शहीद पथ हादसे के बाद से सवाल उठ रहे थे कि बच्चों को लेकर जाने वाले निजी वाहनों की जिम्मेदारी किसकी है? शुक्रवार को बैठक में स्पष्ट किया गया कि स्कूल प्रबंधन को प्राइवेट वाहनों की जिम्मेदारी लेनी होगी। बैठक में मुख्य रूप से संयुक्त पुलिस आयुक्त (काननू-व्यवस्था) अमित वर्मा, डीसीपी ट्रैफिक प्रबल प्रताप सिंह, सहायक जिला विद्यालय निरीक्षक मनीषा द्विवेदी, आरटीओ प्रवर्तन संदीप कुमार पंकज शामिल रहे।
फीस लेने में प्रबंध सजग रहता है तो सुरक्षा को लेकर भी हो संजीदा
बैठक में साफ तौर पर कहा गया कि जब बच्चों की फीस व अन्य खर्चों को लेकर प्रबंधन सजगता दिखाता है, तो उनकी सुरक्षा को लेकर भी उन्हें संजीदगी दिखानी होगी। बच्चे किस वाहन से आ रहे हैं, उनकी फिटनेस, उनके कागजात, सुरक्षा उपकरणों की जांच सहित सेफ्टी व सिक्योरिटी का पूरा डाटा बैंक तैयार करना होगा। यह काम स्कूल प्रबंधन को करना होगा। अनफिट वाहन से बच्चे को स्कूल नहीं भेजने के लिए पैरेंट्स-टीचर मीटिंग में उन्हें अभिभावकों को भी जागरूक करना होगा।
हाइड्रोलिक पार्किंग बनाएं, स्कूल परिसर में ही बच्चों को उतारें और वहीं से ले जाएं
बैठक में हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया। पहले चरण में हजरतगंज व राजभवन क्षेत्र के स्कूलों से यह कहा गया कि पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को स्कूल परिसर के अंदर ही उतारा जाए और वहीं से ले भी जाया जाए। किसी भी कीमत पर बच्चों को स्कूल के बाहर से लाने और ले जाने की व्यवस्था बंद हो। जरूरत पड़ने पर स्कूल हाइड्रोलिक पार्किंग बनवाएं। अगले चरण में सभी स्कूलों में इसको लागू किया जाएगा।
स्कूलों ने क्या किया...यह जानने के लिए 25 को फिर होगी बैठक
अधिकारियों ने बताया कि स्कूल प्रबंधन को जो जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, उसे लेकर कितनी संजीदगी दिखाई जा रही है, इसके लिए फॉलोअप मीटिंग होगी। यह बैठक 25 सितंबर को होगी। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन को यह आश्वासन दिया है कि निर्देशों के पालन में पुलिस उनकी हरसंभव मदद करने को तैयार है।
कुछ अन्य दिशा निर्देश
एक मोहल्ले से एक ही गाड़ी से बच्चों को भेजें अभिभावक।
स्कूल के बाहर खड़ी होने वाली गाड़ियों का ब्योरा रखें।
चालकों और अभिभावकों का मोबाइल फोन नंबर स्कूल प्रबंधन को रखना होगा।
स्कूलों के सीसीटीवी कैमरों का एक्सेस ट्रैफिक पुलिस को देना होगा।
स्कूलों की छुट्टी के समय ही अभिभावक पहुंचें। समय से पहले आने पर बढ़ेगा वाहनों का दबाव।
स्कूल प्रबंधन ने रखी मांग
परिसर के बाहर नगर निगम की टीम भी मौजूद रहे।
अतिक्रमण हटाया जाए ताकि स्कूलों के बाहर दुकानें न लग सकें।
आइसक्रीम के ठेले सड़क पर कब्जा कर लेते हैं, इन्हें हटाया जाए।
ट्रैफिक पुलिस स्कूल खुलने और बंद होने के समय मौजूद रहे।
अराजकतत्वों को स्कूलों के बाहर नहीं खड़ा होने दिया जाए।
स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई से पहले प्रबंधन की समस्या को भी समझा जाए।
निजी स्कूल प्रबंधक एसोसिएशन ने कहा-
हादसा होने पर चालक होंगे जिम्मेदार
निजी स्कूल प्रबंधक एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल का कहना है कि अगर सड़क हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित वाहन चालक की होगी। स्कूल प्रबंधन निजी वाहनों की एजेंसी का ब्योरा रखेगा और घटना होने पर उनकी जवाबदेही तय की जाएगी। वाहनों का डाटा बैंक तैयार किया जाएगा। इसके लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
-यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने में विद्यालय पूरा सहयोग करेंगे। प्रशासन की अपेक्षा है कि स्कूलों की छुट्टी के समय यातायात बाधित न हो। इसके लिए विद्यालयों के सभी गेटों पर संस्थान के कर्मचारी तैनात होंगे, ताकि किसी तरह की दिक्कत न हो।
इधर, स्कूल प्रबंधकों को नई गाइडलाइन की दी गई जानकारी
स्कूली वाहनों की वजह से लगने वाले जाम एवं बच्चों की सुरक्षा को लेकर शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी ने सभी विद्यालयों के लिए एडवाइजरी जारी की है। शुक्रवार को एसीपी कृष्णानगर विनय कुमार द्विवेदी ने अपने क्षेत्र के सभी विद्यालय प्रबंधकों एवं प्रधानाचार्यों के साथ बैठक की।
एसीपी कृष्णानगर ने बैठक में कहा कि सभी विद्यालयों में ट्रैफिक कंट्रोल रूम बनाए जाएं। कंट्रोल रूम के सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से विद्यालय के बाहर और पार्किंग स्थल की निगरानी की जा सकेगी। स्कूलों के बाहर लगने वाले जाम को देखते हुए कंट्रोल रूम में पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ ही एक नोडल ट्रैफिक अधिकारी की नियुक्ति की जाए। ये कर्मी सफेद ड्रेस और स्कूल के बैज के साथ तैनात किए जाएं। विद्यालय का नोडल ट्रैफिक अधिकारी यातायात प्रबंधन के लिए उत्तरदायी होगा।
एसीपी ने केंद्रीकृत अनाउंसमेंट सिस्टम लगाने, सभी गेटों और सड़क की ओर सीसीटीवी कैमरे लगाने, सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग 60 दिनों तक सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए।