छात्रवृत्ति घोटाले की तफ्तीश कर रही ईडी ने हाइजिया ग्रुप के संचालकों व कर्मचारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। ईडी को आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत मिले हैं। उसी आधार पर आरोप तय किए हैं। कई और आरोपियों की भूमिका ईडी तलाश कर रही है । निदेशालय का कहना है कि जिनके खिलाफ साक्ष्य मिलेंगे उनको गिरफ्तार कर कार्रवाई की जाएगी।
पिछले साल ईडी ने छात्रवृत्ति घोटाले से संबंधित जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि करीब दो सौ करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। ईडी ने इस संबंध में राज्य सरकार को भी जानकारी दी थी। जिसके आधार पर पुलिस ने हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की थी। दूसरी तरफ ईडी की जांच लगातार जारी रही।
सुबूतों के आधार पर अप्रैल में हाइजिया ग्रुप के संचालकों इजहार हुसैन जाफरी उर्फ हनी जाफरी, अली अब्बास जाफरी व उनके कर्मचारी रवि प्रकाश गुप्ता को गिरफ्तार कर किया था। तीनों को कोर्ट में पेश किया था। जहां से वह जेल भेजे गए थे। सूत्रों के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। फर्जीवाड़ा कर दाखिला देकर छात्रों के नाम पर आरोपियों ने छात्रवृत्ति की रकम हड़पी। पर्याप्त सुबूत जुटाने के बाद चार्जशीट लगाई गई।
हाइजिया ग्रुप ही निकला मास्टरमाइंड, रवि की भूमिका अहम
ईडी की तफ्तीश में स्पष्ट हो गया कि हाइजिया ग्रुप के संचालक ही घोटाले के मास्टरमाइंड थे। किस तरह से छात्रों का दाखिला दिखाना है, कैसे बैंक खाता खुलवाना और फिर कैसे वो रकम पार करनी है। इसकी पूरी साजिश इन्हीं आरोपियों रची और अंजाम दिया। इसमें अन्य आरोपियों ने साथ दिया और रकम हड़पी। आरोपी रवि प्रकाश की भूमिका अहम रही। वह हाइजिया ग्रुप का नोडल था। उसके पास अन्य संस्थानों का लॉगिन आईडी व पासवर्ड उपलब्ध था। मुख्य आरोपियों के इशारे पर वह खेल करता रहा।
रकम आई और चंद दिनों में निकल गई
ईडी की तफ्तीश में सामने आया था कि हजारों खातों में छात्रवृत्ति की जब रकम आई तो दो चार दिन के भीतर ही पूरी रकम निकाल ली गई। खाते में एक रुपये तक नहीं छोड़ा गया। यहीं से घोटाले की संदिग्धता हो गई थी। फिनो बैंक ने जब इससे संबंधित दस्तावेज ईडी को उपलब्ध कराए तो इसकी पुष्टि हो गई। फिर एक एक परत खुलती गई।