रायबरेली। नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद की कुर्सी पहली बार अनुसूचित वर्ग की झोली में गई है। अब तक हुए सात चुनावों में छह बार सामान्य और एक बार पिछड़ी वर्ग के अध्यक्ष का कब्जा रहा है।बृहस्पतिवार को शासन स्तर से जारी हुई अनंतिम आरक्षण सूची के बाद अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित हुई इस सीट से जहां दावेदारों के चेहरों पर रौनक दिखने लगी है, वहीं सीट से चुनाव लड़ने की आस लगाए बैठे सामान्य वर्ग व पिछड़े वर्ग के धुरंधरों के मंसूबों पर पानी फिर गया।
नगर पालिका रायबरेली 1914 में ही अस्तित्व में आ गई थी। 1914 से साल 1971 तक अध्यक्ष पद के लिए चुनाव नहीं होता था। सिर्फ सभासद ही चुनाव जीतकर अपने बीच से ही एक को अध्यक्ष चुनते थे। वर्ष 1971 से 1988 तक 17 साल तक पालिका की कुर्सी की जिम्मेदारी प्रशासक के हवाले रही। पिछले साल दिसंबर में जारी अनंतिम आरक्षण सूची में नगर पालिका अध्यक्ष पद की सीट पिछड़े वर्ग को चली गई थी। नए सिरे से आरक्षण प्रक्रिया होने के बाद बृहस्पतिवार को यह सीट अनुसूचित जाति की झोली में गई है।
नगर निकायों में कहीं बिगड़ा तो कहीं बना समीकरण
नगर पंचायत महराजगंज के अध्यक्ष पद की सीट पहली बार अनारक्षित घोषित हुई है। ऐसे में बड़े धुरंधरों के मैदान में आने की उम्मीद बढ़ गई है। पहली बार नगर पंचायत बनी शिवगढ़ अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हुई है। इसके अलावा बछरावां, परशदेपुर, नसीराबाद व डलमऊ के अध्यक्ष पद अनारक्षित हो गए हैं। लालगंज सीट महिला तो सलोन सीट पिछड़ा वर्ग और ऊंचाहार सीट पिछड़ा वर्ग महिला की झोली में गई है। सलोन सीट पहली बार महिला की झोली में गई है। नसीराबाद व परशदेपुर नगर पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित होने से मुकाबले दिलचस्प होंगे।
एक नगर पालिका और नौ नगर पंचायत अध्यक्ष पदों के लिए अनंतिम आरक्षण सूची जारी की गई है। छह अप्रैल तक आपत्तियां मांगी गईं हैं। निदेशक स्थानीय निकाय निदेशालय लखनऊ में आपत्तियां जमा की जा सकेंगी। आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम सूची का प्रकाशन होगा।
माला श्रीवास्तव, जिलाधिकारी