लखनऊ। सनतकदा महोत्सव सोमवार को इश्क और मुश्क के नाम रहा। महोत्सव के मंचों से मोहब्बत के मुखतलिफ पहलुओं पर गुफ्तगू हुई। इस दौरान इश्क और इत्र के साथ ही आशिकी और उर्दू अदब के आपसी रिश्ते को भी तलाशा गया। सफेद बारादरी का मंच कैफी आजमी और उनकी शरीक-ए-हयात शौकत की मोहब्बत का गवाह बना। वहीं सलेमपुर हाउस के मंच पर आशिकाना अंताक्षरी पर फिल्मी गानों पर दर्शक झूमते रहे।
सलेमपुर हाउस नसीम इक्तेदार अली लिटरेरी गुफ्तगू के मंच पर मानव वैज्ञानिक व परफ्यूमर गीती दत्त और श्रुति शांडिल्य के बीच इश्क और इत्र पर चर्चा हुई। इसमें बताया गया कि खुशबुओं का भी जिंदगी पर खासा असर दिखाई देता है। गीती दत्त ने बताया कि भारतीय इत्र का अपना इतिहास रहा है। जहांगीर की पत्नी नूरजहां की मां असमत बेगम ने गुलाब जल का इजाद किया था जिसे नूरजहां ने आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि तमाम लोगों को खुशबू से इश्क होता है।
इश्क का सबसे असरदार जरिया है शायरी
सलेमपुर हाउस के नसीम इक्तेदार अली लिटरेरी गुफ्तगू मंच पर ही आशिकी और उर्दू अदब के रिश्ते की तलाश भी पूरी हुई। लेखिका डाॅ. सबीहा अनवर, आयशा सिद्दीकी और फातिमा रिजवी ने कहा कि इश्क का इजहार करने का सबसे असरदार जरिया शायरी रही है। अमीर खुसरो से लेकर मौजूदा वक्त के शायरों के कलाम में इश्क और आशिकी अलग-अलग अंदाज में दिखाई देती है। सभी ने माना इश्क का जज्बा हमेशा कायम रहेगा, इसे मिटाया नहीं जा सकता है।
मोहब्बत रिश्ते का नहीं जज्बे का नाम
सफेद बारादरी में अमृतलाल नागर किस्सागोई तख्त पर 500 कहानियों और 50 नावेल की लेखिका मसरूरजहां के अफसानों में मोहब्बत के कई पहलुओं को उनकी नातिन सायरा मुज्तबा और शायरा आयशा सिद्दीकी तलाशती दिखाई दीं। आयशा ने कहा कि मोहब्बत ऐसा जज्बा है जो हर इंसान के दिल में उठता है, यही जज्बा इश्क का रूप लेता है और कभी कभी ये मोहब्बत करने वाले को फनाह भी कर देता है।
कैफी आजमी और शौकत की मोहब्बत का गवाह बना सनतकदा
सनतकदा महोत्सव में सफेद बारादरी का अमृतलाल नागर किस्सागोई तख्त कैफी आजमी और शौकत की मोहब्बत का गवाह बना। दास्तानगो हिमांशु बाजपेई और प्रज्ञा शर्मा ने कैफी आजमी के शायर बनने के सफर के साथ उनकी शौकत से मुलाकात से लेकर मोहब्बत के परवान चढ़ने तक के पहलुओं को दास्तानगोई में पेश किया। हिमांशु ने कहा कि कैफी के वालिद बड़े दूर अंदेश आदमी थे। कैफी के खेतों में लड़कियों को फसल देने के किस्से से उनकी आशिक मिजाजी से लोगों को रूबरू कराया। इसके बाद उनके पिता ने 1932 में गांव मितवा से लखनऊ भेज दिया। लखनऊ के मदरसे सुलतानुल मदारिस में उनका दाखिला करवाया गया ताकि वो फातिहा पढ़ना तो सीख ही लेंगे। तरक्की पसंद सोच के कैफी मजहब का फातिहा पढ़कर वहां से निकल आए। कहा, लखनऊ में तो जर्रा भी आफताब बन जाता है तो कैफी की शोहरत भी बढ़ चुकी थी। उन्होंने बताया कि कैफी जब मुशायरे के लिए हैदराबाद गये तो वहीं पर शौकत से उनकी मुलाकात हुई।
बेगम अख्तर की मजार पर दी हाजिरी
सनतकदा महोत्सव में सोमवार को कार टूर ने पसंदबाग स्थित बेगम अख्तर की मजार तक का सफर तय किया। कार टूर में उनके चाहने वालों ने बेगम अख्तर की मजार पर हाजिरी दी और उनको याद किया।
अंताक्षरी में छाया आशिकाना रंग
सलेमपुर का अड्डेबाजी पर रात में सजी अंताक्षरी में आशिकाना रंग चढ़ा तो फिल्मी गानों पर लोग झूम उठे। शुभ्रा और अनसफ के संचालन में सजी आशिकाना अंताक्षरी में महबूब, महबूबा, रकीब और प्यार के दुश्मन टीमों के बीच मुकाबले में जिया अहमद खान, मो. राशिद और तूलिका बनर्जी ने जज की भूमिका निभाई। मुकाबले में गाने की धुन पर टीम को गाने का सही अनुमान लगा कर गीत सुनाना था। रकीब टीम के हारने के बाद दर्शकों के बीच से प्यार के दुश्मन नामक टीम में शामिल किए गए निगरा और मोहित पांडेय। मुकाबले में महबूबा टीम के ऋत्विक और अजीम जीते। अंताक्षरी में तबले पर इलियास अहमद खान, ढोलक पर अफ्फाक वारसी, हारमोनियम पर किटटू शर्मा, गिटार पर जफर अंसारी ने संगत की।