लखनऊ। महाठग संजय राय शेरपुरिया के गिरोह का एजेंट नोएडा निवासी मोहम्मद कासिफ था। एक सप्ताह पहले ही एसटीएफ नोएडा की टीम ने उसको गिरफ्तार कर जेल भेजा था। कासिफ से संजय को लेकर अहम इनपुट मिला था।
एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ कि संजय के साथ कासिफ एजेंट की तरह काम करता था। वह लोगों को ठेका दिलाने, ट्रांसफर-पोस्टिंग कराने व जांच आदि रफादफा कराने का झांसा देकर जाल में फंसाकर संजय से मिलवाता था। तब संजय उन लोगों से फाइल डील करता था।
एसटीएफ ने मंगलवार रात कानपुर सेंट्रल स्टेशन से मूलरूप से गाजीपुर निवासी संजय राय को पकड़ा था। विभूतिखंड थाने में केस दर्ज कर बुधवार को कोर्ट में पेश किया था। जहां से वह जेल भेजा गया था।
एसटीएफ ने खुलासा किया था कि संजय सत्ताधारी शीर्ष नेताओं के साथ की फोटो का इस्तेमाल कर लोगों को झांसे में लेकर उनसे उगाही करता है। दिल्ली के उद्योगपति गौरव डालमिया की कंपनी की चल रही वित्तीय अनियमितताओं की जांच केंद्रीय एजेंसी से रफादफा कराने का दावा कर उनसे छह करोड़ रुपये संजय ने लिए थे। हवाला, टैक्स चोरी व मनी लांडि्रंग का आरोप भी है।
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक एक सप्ताह पहले नोएडा के सेक्टर 107 निवासी मोहम्मद कासिफ को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। वह पीएम समेत अन्य कई बड़े नेताओं के साथ अपनी फोटो एडिट कर रखता था।
इसके जरिए पहुंच बताकर ठगी करता था। सूत्रों ने बताया कि कासिफ का सीधा कनेक्शन संजय राय से था। कासिफ का मुख्य काम लोगों को जाल में फंसाकर संजय तक पहुंचाना रहता था। प्रयास रहता था कि इसमें बड़े लोग शामिल रहें। ताकि मोटी रकम वसूली जा सके।
आपस में सिर्फ व्हाट्सएप कॉल पर बातचीत
संजय अमूमन हर किसी से व्हाट्सएप या फेसटाइम कॉल पर ही बातचीत करता था। एसटीएफ ने इसका जिक्र एफआईआर में भी किया है। जानकारी के मुताबिक जो लोग काम करवाने के लिए संजय से संपर्क करते थे उनसे भी वह नेट कॉलिंग के जरिये बातचीत करता था। वह प्रयास करता था कि अधिक से अधिक बातचीत उसकी कासिफ से हो जाए। वह खुद बहुत कम बात करता था।
पूछताछ में नहीं स्वीकारा
कासिफ से पूछताछ व अन्य सुबूतों के जरिये पता चला था कि वह संजय का करीबी है। इंटेलीजेंस संजय को लेकर पहले से सक्रिय थी। पहली कार्रवाई कासिफ पर हुई। इसके बाद संजय जद में आ गया। जब संजय पकड़ा गया तो एसटीएफ ने कासिफ को लेकर बातचीत की। तब वह उससे संपर्क होने की बात नहीं स्वीकारी। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में वह फंस गया।
एनजीओ के खाते में पहले पांच और दूसरी बार में आई थी एक करोड़ की रकम
महाठग संजय जयपुरिया ने उद्योगपति गौरव डालमिया से दो बार में छह करोड़ रुपये लिए थे। पहली बार 21 जनवरी 2023 को पांच करोड़ व दूसरी बार 23 जनवरी को एक करोड़ रुपये संजय शेरपुरिया की एनजीओ के खाते में आए थे। यूथ रूरल इंटरप्रेन्योर फाउंडेशन के खातों में रकम आने की पुष्टि हुई है। ये रकम डालमिया फैमिली ऑफिस ट्रस्ट के खाते से भेजी गई। एसटीएफ ने इससे संबंधित सभी दस्तावेज विभूतिखंड पुलिस को सौंपे हैं। इसके आधार पर पुलिस ने केस की विवेचना शुरू की है। एसटीएफ के मुताबिक संजय के मोबाइल से चार पन्नों की व्हाट्सएप चैट इकट्ठा की गई है, जिसमें गौरव डालमिया से भी उसकी चैट है। ये चैट 6 से 24 अप्रैल के बीच की है। 14 अप्रैल की चैट में 15 अप्रैल को सुबह 10:30 बजे दोनों ने मिलने की बात की थी। इसमें संजय ने मिलने के लिए हामी भरते हुए यस लिखा था। सूत्रों के मुताबिक इस दिन दोनों ने मुलाकात भी की थी। गौरव ने अपने केस से संबंधित जानकारी ली थी कि कब तक मामला खत्म हो जाएगा। जानकारी है कि इस दिन संजय व गौरव की एक ही लोकेशन पाई गई, जिससे इसकी पुष्टि हुई। खाते में रकम लेना संजय से लिए मुसीबत बन गया।
प्रोटोकाॅल से भौकाल
संजय राय पूरे प्रोटोकॉल में रहता था। एक पीएसओ भी रखा था। उसका एक करीबी सोशल मीडिया हैंडल करता था। इसमें मनीष त्रिपाठी व हेमंत नेगी शामिल हैं। जब एसटीएफ ने संजय को पकड़ा था तो ये दोनों भी साथ में मौजूद थे। इनसे भी पूछताछ की गई थी और फिर छोड़ दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक संजय के ठगी के कारोबार में जो लोग शामिल होंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर जानकारी जुटाने का काम चल रहा है। संजय के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। कई नामचीन शख्सियत से बातचीत होने की बात सामने आई है। कुछ संदिग्ध लोग भी चिन्हित किए गए हैं। जिनको लेकर आशंका है कि वह शायद संजय के गिरोह में शामिल हैं।
एक-एक फोटो एसटीएफ ने पुलिस को सौंपी
सजंय के सोशल मीडिया एकाउंट पर नेताओं के साथ की उसकी तमाम फोटो पोस्ट थीं। एसटीएफ ने इन सभी फोटो को एफआईआर की तहरीर के दौरान ही पुलिस को सौंप दी थी। कुछ ऐसी फोटो हैं जिसमें वह एनजीओ की बोर्ड मीटिंग लेते हुए है। एक दो फोटो कंपनी के पदाधिकारियों के साथ की गई बैठक की हैं। ये फोटो भी बेहद अहम हैं। क्योंकि संजय एनजीओ व कंपनी में सीधे कोई पदाधिकारी नहीं है। आरोप साबित करने के लिए पुलिस इसको साक्ष्य के तौर पर कोर्ट में सामने रखेगी।
मुंबई में गार्ड रहा, गुजरात पहुंच बनाया करोड़ों का साम्राज्य, कई अफसर-नेता नतमस्तक
लखनऊ। महाठग संजय शेरपुरिया की कहानी चौंकाने वाली है। वह बचपन में असम में अपने पिता के साथ रहता था। पिता परचून की दुकान चलाते थे। दसवीं की पढ़ाई के बाद वह मुंबई गया था। वहां सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की। कुछ समय बाद वह गुजरात चला गया था। गुजरात में उसने पहले रिफाइनरी में काम किया था। कुछ वर्षों बाद उसने करीब हजार करोड़ का लोन लिया और कंपनी खड़ी कर दी। अकूत संपत्ति बनाई। कई बड़े नेता और अफसर उसके सामने नतमस्तक रहते थे। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, बहुत कम समय में संजय राय ने करोड़ों रुपये का साम्र्राज्य बनाया। इसी से शक था कि कहीं न कहीं उसने बड़ा खेल किया। एसबीआई बैंक से वह डिफाॅल्टर है। उसकी पत्नी भी कारोबार में साझेदार रही है। इसलिए बैंक दोनों के बारे में मीडिया के जरिये सूचना जारी की है। दो सप्ताह के भीतर रकम चुकाने का वक्त दिया है। सूत्रों के मुताबिक गुजरात में उसने कांडला एनर्जी एंड केमिकल लिमि कंपनी में सबसे अधिक पैसा खपाया। जब कंपनी दिवालिया हो गई तब वह करीब सात साल पहले दिल्ली चला गया था। यहां पर उसने अपना जाल फैलाया। राइडिंग क्लब के आवास में दाखिल हुआ और वहीं से बैठकर फर्जीवाड़ा कर ठगी करने का नेटवर्क चलाने लगा।
चार से पांच कंपनियों के जरिये बड़ा खेल
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक कांडला एनर्जी एंड केमिकल लिमि. कंपनी के अलावा भी उसकी चार से पांच कंपनियां हैं। ये शेल कंपनियां हैं। इसके जरिए मनी लांडि्रंग का खेल किया गया। कालेधन को सफेद करने का धंधा भी किया। उसको पता था कि वह फंस सकता है, इसलिए वह इन कंपनियों में पदाधिकारी नहीं बना। सामान्य किसी कर्मचारी को इसमें निदेशक बना डाला। हालांकि तब भी एसटीएफ ने उसके खिलाफ कुछ साक्ष्य ऐसे जुटाए हैं, जिससे साबित हो कि संजय इन कंपनियों से जुड़ा हुआ है।
विदेश से पैसा आने की आशंका, खंगाले जा रहे खाते
शुरुआती तफ्तीश में संजय के एनजीओ के खातों में करोड़ों का लेनदेन मिला है। जांच एजेंसी एक-एक ट्रांजेक्शन खंगाल रही है। विदेश से भी रकम आने की आशंका है। ईडी भी इसमें जल्द केस दर्ज कर सकती है।