थुलेंडी-कन्नावां संपर्क मार्ग। यहां से आगे बढ़ें तो धूल का गुबार और धुंए की गंध में सांस लेना मुश्किल। माजरा समझने में वक्त लगता कि इससे पहले ही नजर सामने चल रहे हॉटमिक्स पर पड़ी। पूरा मामला ही स्पष्ट हो गया।
थुलेंडी गांव में संचालित यह हॉटमिक्स प्लांट ग्रामीणों के लिए नासूर बन गया है। लोग बीमार पड़ रहे हैं। बच्चों की हालत भी खराब हो रही है। खासकर, सांस और हृदय रोगियों की मुश्किल तो कुछ ज्यादा ही है। शिकायत अधिकारियों तक हुई। लेकिन समाधान नहीं हो सका। अभी भी हॉटमिक्स बेधड़क चल रहा है।
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30 गांवों की 45 हजार आबादी प्रभावित
प्लांट के दायरे में आ रहे 30 गांवों के 45 हजार से अधिक लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है। हॉटमिक्स प्लांट से लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड की सड़कों के लिए डामर और गिट्टी का मिश्रण तैयार करता है। यही कारण है कि बड़ी मात्रा में धुएं के साथ धूल के कण निकल रहे हैं। इससे सरैया, जलालपुर, रसूलपुर, पहनासा व मलपुर के लोगों की भी सांसत हो गई है।
हाल बुरा है...
थुलेंडी निवासी दिलीप पाठक व रामनिहोर ने बताया कि हॉटमिक्स प्लांट से निकलने वाली धूल से सांस की बीमारी बढ़ रही है। ठंड के समय तो हालत और भी बुरी हो गई है। शिकायत के बाद भी समाधान नहीं हो रहा। ऐसे ही रहा तो जिला मुख्यालय पहुंचकर कर प्रदर्शन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
डीजल की जगह एलडीओ का प्रयोग
प्लांट संचालन में डीजल का प्रयोग करना चाहिए। लेकिन यहां लाइट डीजल ऑयल (एलडीओ) का प्रयोग किया जा रहा है। डीजल की अपेक्षा इसके सस्ता होने से मनमानी चल रही है और प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
होना तो यह चाहिए
-हॉटमिक्स के आसपास समय-समय पर पानी का छिड़काव हो
-ग्रामीण आबादी से दूर प्लांट का संचालन हो
-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों का ध्यान रखा जाय
अब इनकी सुनिए
प्लांट के अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में ऑनलाइन आवेदन किया है। जल्द ही एनओसी मिले, इसके लिए संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी।
थुलेंडी में प्लांट की शिकायत मिली थी। इस पर टीम मौके पर जांच करने पहुंची थी। लेकिन तब मौके पर प्लांट बंद मिला था। मौजूद कर्मचारियों से प्लांट संचालन से पहले एनओसी लेने के लिए कहा गया है। यदि बिना एनओसी प्लांट चलता मिला तो कार्रवाई की जाएगी।
प्रदीप विश्वकर्मा, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी