फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुना है क्या: चहेतों के चक्कर में बंटाधार, साथ ही 'डिजिटल वार से जीत का सपना और चुनावी दौर में कमाई' के किस्से

Sun, 04 Oct 2026 12:28 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
विज्ञापन
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'चहेतों के चक्कर में बंटाधार' की कहानी। इसके अलावा 'डिजिटल वार से जीत का सपना' और 'चुनावी दौर में खूब कमाई' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

चहेतों के चक्कर में बंटाधार

भगवा दल में इन दिनों कुर्सी बांटने का खेल चल रहा है। इनमें सबसे अधिक पार्टी के प्रचार-प्रसार और पाटी व सरकार की ब्रांडिंग वाले विंग में आपस में ही सिर फुट्टौवल की स्थिति है। विंग में जिसे पद मिल चुका है वह अपने ही पुराने विरोधियों को निपटाने में जुटें हैं। चर्चा है कि पिछली टीम में सहयोगी की भूमिका में रहे अपने ही टीम के लोगों की निकम्मा बताकर उनको नई टीम से बाहर करने के लिए जमकर लामबंदी की गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर ऐसे ही आपसी जंग जारी रही तो चुनावी सीजन में पार्टी की छवि का बंटाधार होना तय है।

डिजिटल वार से जीत का सपना

चुनाव घोषित होने में अभी वक्त है, लेकिन पक्ष-विपक्ष ने एक-दूसरे के खिलाफ डिजिटल वार छेड़ दिया है। व्यक्तिगत हमले किए जा रहे हैं, जिसका अपने-अपने समर्थक खूब लुत्फ उठा रहे हैं। दोनों पक्ष कह रहे हैं कि हम तो बस क्रिया की प्रतिक्रिया कर रहे हैं। ...अब एक पक्ष ने तय कर लिया है कि वे अपनी ओर से नवरात्र में इस डिजिटल वार को विराम दे देंगे। सिर्फ सकारात्मक ढंग से अपनी बात रखेंगे। देखते हैं दूसरा पक्ष क्या निर्णय लेता है।

चुनावी दौर में खूब कमाई

ग्रामीण क्षेत्र से संबंधित एक विभाग में खूब मौज चल रही है। कई अहम कार्यों के लिए सरकारी फीस का दो गुना तक रिश्वत के रूप में वसूला जा रहा है। चर्चा है कि नीचे से ऊपर तक माल पहुंचाना पड़ता है, इसलिए वसूली जोरों पर है। इसके पीछे की वजह आगामी चुनाव भी हैं। बताते हैं कि इसमें खादी वाले भी सीधा हस्तक्षेप करते हैं, लिहाजा मकसद है कि चुनाव तक जितना अधिक माल बटोरा जा सके। इसलिए कर्मचारी, अधिकारियों से लेकर खादी वाले भी मोटी कमाई कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें