लखनऊ। एसजीपीजीआई के डॉक्टर अब नवजात के जन्मजात हृदय रोग पर आसानी से शोध कर सकेंगे। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने इसके लिए 4.18 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है। शोध में डॉक्टर जन्मजात हृदय दोष के आनुवंशिक और आणविक कारणों का पता लगाएंगे। शोध के परिणाम से बीमारी की रोकथाम और इलाज की दिशा तय की जा सकेगी। परियोजना का नेतृत्व करने वाले डॉ. चंद्र प्रकाश चतुर्वेदी ने बताया कि आईसीएचडी नवजात में सबसे आम हृदय विकृति है। आधुनिक तकनीकों से इसकी प्रारंभिक पहचान संभव है, लेकिन इसके आनुवंशिक कारण स्पष्ट नहीं हैं।