लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण के भूखंडों की फर्जी दस्तावेज से रजिस्ट्री का खेल बड़े गिरोह ने किया है। इस गिरोह में कर्मचारी व अधिकारियाें के अलावा प्रॉपर्टी डीलर व दलाल शामिल हैं। फर्जीवाड़ा एक निलंबित कर्मचारी के कोड का इस्तेमाल कर किया गया है। एलडीए के उप सचिव माधवेश कुमार ने इसे लेकर गोमतीनगर थाने में दो और मुकदमे दर्ज कराए हैं। इसमें एक कर्मचारी, हाईकोर्ट के अधिवक्ता सहित नौ लोगों को आरोपी बनाया गया है।
प्रभारी निरीक्षक गोमतीनगर दिनेश चंद्र मिश्रा के मुताबिक एलडीए के उप सचिव माधवेश कुमार की तहरीर के मुताबिक निलंबित कर्मचारी अजय प्रताप वर्मा के कोड का प्रयोग कर दो अन्य भूखंड की रजिस्ट्री की गई। इसमें वास्तुखंड 3/521 की जमीन को इसी खंड की रहने वाली विमला तिवारी ने 15 मई 2019 को निधि पांडेय को बेच दिया। फर्जी दस्तावेज में दावा किया गया कि यह जमीन विमला तिवारी को मई 2000 में एलडीए ने रजिस्ट्री की थी। इस मामले में गवाही देने वालों में वास्तुखंड निवासी अमित कुमार व विनय खंड के आशीष सक्सेना शामिल हैं। इसके अलावा निलंबित कर्मचारी अजय प्रताप वर्मा के कोड से वास्तुखंड 3/564 का फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार कर इसकी रजिस्ट्री कर दी गई। इस भूखंड की रजिस्ट्री बाराबंकी के दरियाबाद की रईसा खातून ने बाराबंकी रामसनेही घाट सादुल्लापुर निवासी सत्यदेव को 2020 में कर दी। दस्तावेज में हेराफेरी कर दावा किया कि भूखंड को एलडीए ने उनको रजिस्ट्री की थी। इस मामले में हाईकोर्ट के वकील मनोज कुमार और बाराबंकी सादुल्लापुर रामसनेही घाट निवासी उमाशंकर ने गवाही दी थी।
प्रभारी निरीक्षक गोमतीनगर दिनेश चंद्र मिश्रा के मुताबिक उप सचिव माधवेश कुमार की तहरीर पर निलंबित कर्मचारी अजय प्रताप वर्मा, रईसा खातून, सत्यदेव, उमाशंकर, मनोज कुमार, विमला तिवारी, निधि पांडेय, अमित कुमार, आशीष सक्सेना के खिलाफ जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने व साजिश रचने का केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।