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वसूली का खेल : अपराधियों के साथ पुलिस की दबिश

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लखनऊ। कुछ पुलिसकर्मियों ने अपराधियों संग मिलकर टीम बना रखी है। ये सभी मिलकर अन्य अपराधियों को चिह्नित करते हैं। फिर छापा मारकर उनको उठाते हैं और रकम वसूलकर छोड़ देते हैं। वसूली अपराधी से होती है इसलिए मामला दबा रहता है। हसनगंज पुलिस पहले भी इस तरह के एक मामले को लेकर सवालों के घेरे में आई थी, मगर इस बार करतूत उजागर हो गई। पहले मामले में लोगों ने खदेड़ दिया था इसलिए वहां वसूली नहीं कर सके थे। इस बार व्यापारी को अगवा कर रकम लूटी और फिरौती भी मांगी।
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फतेहपुर जिले के थरियांव स्थित एक हाते में चार अप्रैल को हसनगंज पुलिस ने छापा मारा था। हाते में रहने वाले लोगों ने बदमाश समझकर पुलिस टीम पर हमला कर दिया था। वहां छापा मारने वाली टीम में एक दरोगा के अलावा हेड कांस्टेबल युसुफ, बर्खास्त सिपाही धीरेंद्र व बिचौलिया शेखर भी शामिल था। खुलासा हुआ था कि इनायत नाम के एक अपराधी का सत्यापन करना था। वहां दबिश का कोई निर्देश नहीं था। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने अपराधियों के साथ मिलकर दबिश दी थी।
वहां भी वसूली की साजिश थी मगर हाते वालों ने उन्हें खदेड़ दिया था। इस वजह से वह इनायत को उठा नहीं सके थे। मामले में जांच के आदेश हुए मगर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई थी। यही वजह है कि मनबढ़ पुलिसकर्मियों ने एक बार फिर वसूली के लिए व्यापारी इश्तियाक को अगवा कर लिया। मामले में अपहरण व लूट समेत अन्य धाराओं में दर्ज एफआईआर में जो सात नामजद आरोपी हैं, उसमें से हेड कांस्टेबल यूसुफ, बर्खास्त सिपाही धीरेंद्र व शेखर फतेहपुर में दबिश देने वाली टीम में भी शामिल थे।
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दरअसल अपराधी व पुलिसकर्मियों की ये वसूली टीम अपराधियों को ही निशाना बनाती है। क्योंकि उनको भरोसा रहता है कि वह पुलिस में शिकायत नहीं करेगा। इसलिए वह उनको उठाकर जेल भेजने की धमकी आदि देकर वसूली करते हैं। इस बार भी जिस कपड़ा व्यापारी इश्तियाक को उठाया, उस पर चोरी के केस दर्ज हैं। किसी के जरिये इसकी जानकारी हुई और उसे आजमगढ़ से उठा लिया। रकम लूटी और रंगदारी वसूलने का प्रयास भी किया। मगर इश्तियाक ने पुलिस से शिकायत कर दी। जिससे गिरोह का भंडाफोड़ हो गया।

शुक्रवार को मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को हुई थी। जिसके बाद जांच के आदेश हुए। जब आरोपियों को लगा कि मामले में कार्रवाई हो जाएगी तो शनिवार को आरोपी शेखर ने एक वीडियो बयान जारी किया। जिसमें उसने कहा कि मैंने अपहरण आदि की जो सूचना दी थी वह झूठी है। शराब के नशे में आपस में विवाद हुआ था। दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया है। इस वीडियो बयान से शेखर पर शक गहरा गया था। कुछ घंटे में उसकी पूरी भूमिका उजागर हो गई। शेखर ने वीडियो इसलिए जारी किया, क्योंकि उसे पता था कि अगर एफआईआर हुई तो वह भी जद में आएगा।


वारदात के दिन इश्तियाक ने तहरीर दे दी थी। लेकिन, उसके बारे में पुलिस को कुछ पता नहीं था। तहरीर में उसका मोबाइल नंबर भी नहीं लिखा था। बिजनौर पुलिस की मदद से लखनऊ पुलिस ने उससे संपर्क किया। तब पता चला कि इश्तियाक बहुत डरा हुआ है। दरअसल आरोपियों ने घटना के बाद उसे डरा-धमकाकर बिजनौर भेज दिया था। इसलिए वह सामने नहीं आ रहा था। आरोपियों ने उसे जेल भेजने की धमकी दी थी। कहा था- एनकाउंटर भी हो सकता है।
कुछ वक्त पहले इश्तियाक लखनऊ आया था। आरोपियों को इश्तियाक के आपराधिक इतिहास के बारे में पता था। उनमें से किसी एक ने इश्तियाक से मुलाकात की। उससे कहा था कि वह उनसे मिलकर ही जाएगा। मगर इश्तियाक बिना मिले चला गया। इसलिए लोकेशन लेकर उसे आजमगढ़ से अगवा कर लिया। उम्मीद थी कि उसके पास से तीन से चार लाख रुपये मिल जाएंगे मगर ऐसा नहीं हुआ।
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