जमुनहा के ककरदरी में करीब 500 बीघा कृषि भूमि नदी में समाई
संवाद न्यूज एजेंसी
तुलसीपुर (श्रावस्ती)। जमुनहा के राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर कभी घट तो कभी बढ़ रहा है। बुधवार रात नौ बजे राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर 127.30 मीटर था। जो बृहस्पतिवार सुबह छह से दोपहर 12 बजे तक 127.60 मीटर मापा गया। जबकि शाम चार बजे जलस्तर 127.20 मीटर पहुंच गया। नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर के कारण इसकी लहरों ने तट पर बसे जमुनहा के ककरदरी गांव में कटान तेज कर दी है।
नेपाल सीमा से सटे ककरदरी गांव के खेतों में राप्ती तेजी से कटान कर रही है। यहां स्थित भारत-नेपाल सीमा स्तंभ नदी से मात्र एक मीटर ही शेष है। जिसे कभी भी राप्ती नदी की उग्र लहरें काट कर अपनी धारा में विलीन कर सकती हैं। नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर के कारण ककरदरी निवासी रामखेलावन का पांच बीघा, विद्या राम का तीन बीघा, बाबू का छह बीघा, सियाराम का पांच बीघा, गुलाम बक्श का तीन बीघा, अमरजीत का चार बीघा, रामनिवास का चार बीघा, दुक्खा का छह बीघा, सत्तू का पांच बीघा, रामविलास का छह बीघा, गुरमूरत का छह बीघा, गंगाराम का आठ बीघा, छंगा का चार बीघा, रामनरेश का चार बीघा, कुनमुन का आठ बीघा, फुलकोरा का छह बीघा, रामसहाय का आठ बीघा, राजाराम का पांच बीघा, रामचंद्र का छह बीघा, बहिर का आठ बीघा सहित गांव के कई अन्य किसानों का करीब 500 बीघा खेत फसल सहित कट कर नदी में समा चुका है। यहां राप्ती की उग्र लहरों ने कई मार्ग को या तो क्षतिग्रस्त कर दिया या अपनी धारा में मिला लिया है।
बरसात में ढह गई दीवार
गिलौला (श्रावस्ती)। गिलौला कस्बे में स्थित परिवहन निगम के बस अड्डे का जीर्णोद्धार कराया गया है। जिसकी बाउंड्रीवाल विगत दिनों हुई बरसात के कारण ढह गई। इतना ही नहीं परिसर में कराई गई इंटरलाकिंग भी दब गई। इससे जहां निर्माण की गुणवत्ता की पोल खुल गई। वहीं गिलौला वासियों को एक बार पुन: समस्या से जूझना पड़ सकता है। ऐसे में स्थानीय निवासियों ने डीएम से निर्माण गुणवत्ता की जांच कराकर कार्रवाई की मांग किया है।