लखनऊ। लंबे समय से विवाद का विषय बनी अल्सर में दी जाने वाली दवा रैनिटिडीन को शोधकर्ताओं ने क्लीनचिट दी है। साप्ताहिक शोध पत्रिका नेचर ने यह शोध प्रकाशित किया है। केजीएमयू के फिजियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. नरसिंह वर्मा ने बताया कि लंबे शोध के बाद इस दवा को कैंसर का कारक नहीं पाया गया है। उनके अनुसार इस रिपोर्ट में केवल कुछ अशुद्धियों का संकेत दिया गया था, जो कुछ निश्चित स्थानों और औषधीय उत्पादन के दौरान थीं। यूनिसेफ इंडिया के सीनियर मेडिकल कंसल्टेंट डॉ. निशांत कनोडिया ने बताया कि जर्नल नेचर में वैज्ञानिक रिपोर्ट में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि रैनिटिडीन के इस्तेमाल और कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं है। इस अध्ययन में 12,680 रैनिटिडीन उपयोगकर्ताओं और 12,680 अन्य रैनिटिडीन जैसी दवाओं के उपयोगकर्ताओं का तुलनात्मक मूल्यांकन किया गया। इसमें पाया गया कि यह दवा कैंसर को बढ़ावा नहीं देती है। यह अध्ययन कोरिया की सुंगक्यंकवान यूनिवर्सिटी सियोल के जू-यंग शिन ने अपनी टीम के साथ किया है।