रकुल प्रीत ने कहा कि फिल्म का बेस करनाल है, लेकिन आधी फिल्म लखनऊ में तो आधी करनाल में शूट हुई है। लखनऊ बहुत ज्यादा शूटिंग फ्रेंडली है। यहां के लोग, यहां की तहजीब, अपनापन वाकई एक मिसाल है। आई लव लखनऊ। कोविड के बीच में इस फिल्म की शूटिंग सेंटेनियल कालेज में व अन्य जगहों पर हुई। चिकनकारी, चाट, कबाब से लेकर सबकुछ ट्राई किया। ये तो घर जैसा बन गया था। रायल कैफे में चाट लंच किया। चिकन के कपड़े इतने खरीद लिए कि अभी तो आधा पहना भी नहीं।
पठान से पहले कितनी एक्शन फिल्म
रकुल पठान का जिक्र करना नहीं भूलीं। उनकी फिल्म कैसे अलग है, इस पर उन्होंने कहा कि पठान से पहले कितनी एक्शन फिल्में आईं। मेरा मानना है कि जब तक ये समस्याएं दूर नहीं हो जातीं, स्थितियां सामान्य नहीं हो जातीं तब तक इस तरह के विषयों पर फिल्में बननी चाहिए। रोमांस, गाली गलौज नार्मल हो गया है, इस तरह के मुददों को भी नार्मल होना चाहिए।
पार्टनर से करते हैं प्यार तो करें सेहत का खयाल
औरतों को यह नहीं बताया जाता कि उनका शरीर कितने बच्चे गिरवा सकता है, लेकिन यह इस फिल्म के जरिए महिलाओं से जुड़े ऐसे तमाम मुद्दों के बारे में पता चलेगा जो उन्हें जानना बेहद जरुरी है। पैडमैन के जिक्र पर उन्होंने कहा कि फिल्मों का सोसायटी पर इतना प्रभाव पड़ता है कि अब दुकानदार सैनेटरी पैड को काले पेपर में लपेट नहीं देता है। इसी प्रकार सोच बदलेगी। इंटरटेनमेंट के जरिए यदि हम समाज में कुछ बेहतर कर सकते हैं तो यह एक मुहिम होगी। हमने फिल्म में दिखाया है कि महिलाओं के शरीर के लिए गर्भनिरोधक गोलियां कितनी हानिकारक हैं।