रायबरेली। जिले में बुधवार को शहर से लेकर देहात क्षेत्रों में हुई बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी। सर्दी बढ़ने के कारण लोग घरों में दुबके रहे। ठंड से लोग बेहाल नजर आए। बिगड़े मौसम से जनजीवन अस्तव्यस्त रहा। बारिश के चलते शहर की सड़कों पर कीचड़ हो गया। इससे लोगों को आने-जाने में भी कठिनाइयां झेलनी पड़ी।
बुधवार सुबह अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। आसमान में काले बादल छा गए और कुछ देर बाद बारिश होना शुरू हो गई। शहर ही नहीं, बल्कि ऊंचाहार, सतांव, जगतपुर, सलोन समेत देहात क्षेत्रों में बारिश हुई। सुबह से ही शुरू हुई बारिश से मौसम और सर्द हो गया। ऐसे में लोग घरों में ही कैद रहे।
कोई अलाव तो कोई हीटर के सहारे सर्दी से बचने का प्रयास करता नजर आया। अपने काम के सिलसिले में शहर आए लोग ठंड से ठिठुरते हुए दिखे। सुपर मार्केट, जिला अस्पताल, बस स्टेशन, कैपरगंज समेत अन्य बाजारों में चहल-पहल कम रही। दोपहर बाद बारिश होना बंद हो गई।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (इग्रुआ) फुरसतगंंज अमेठी के मौसम विभाग के अफसरों के मुताबिक जिले में 10 मिमी. बारिश होना रिकार्ड की गई। न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस, जबकि अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रहा। डलमऊ प्रतिनिधि के मुताबिक सर्दी बढ़ने के बावजूद नगर पंचायत डलमऊ के मुराईबाग और वार्डों में अलाव नहीं जलवाए गए हैं। अधिशासी अधिकारी आरती श्रीवास्तव ने बताया कि अलाव जलवाए जा रहे है।
आलू, सरसों की फसल पर रोग लगने का खतरा
बुधवार को हुई बारिश से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा फायदा हुुआ, जबकि आलू, सरसों की फसल पर रोग लगने का खतरा मंडराने लगा है। जिले में एक लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल से ज्यादा गेहूं की फसल की बोआई की गई है। किसान गेहूं की फसल की सिंचाई कर रहे थे। बारिश से गेहूं की फसल की सिंचाई अब कुछ दिन नहीं करनी पड़ेगी। जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने बताया कि यह बारिश गेहूं के लिए मुफीद है। आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की संभावना बढ़ गई है।
किसान आलू की फसल में मैंकोजेब, प्रोपीनेव, क्लोरोथेलोनील युक्त फफूंदनाशक एक किलो को 400 लीटर पानी में घोल कर प्रति एकड़ के हिसाब छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि सरसों की फसल में फूल निकल रहे हैं। मौसम इसी तरह रहा तो फूल गिर जाएंगे, जिससे फसल नुकसान होगा।