मलिहाबाद। फाल्गुन माह में अटेर सहित कई गांवों में ढोलक की थाप के साथ राधा कृष्ण प्रेम की गाथा आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। शाम ढलते ही गांव में चौपाल लगाकर होली के गीत व ढोलक की थाप का खूब आनंद लिया जा रहा है। अटेर गांव के रामकिशोर बताते हैं कि उनके गांव में लगभग एक सदी से होली गीत गाने की परंपरा चली आ रही, जिसमें बुजुर्गों के साथ नव युवक भी खूब बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। होली के दो सप्ताह पूर्व से ही ग्रामीण टोली बनाकर घर-घर फाग गीत गाना शुरू कर देते हैं। बुजुर्गों का कहना है कि फाग भारतीय परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है,कुछ गांव वालों ने ही इस परंपरा को कायम रखा है।